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राम मंदिर का मामला कब निपटेगा यह तो किसी को नहीं पता लेकिन इस मुद्दे पर बयानबाजी सालों से जारी है। इस बार आर्ट ऑफ लिविंग के प्रमुख अध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर से मिलने वाले मौलाना सलमान हुसैन नदवी ने अपने बयान से सबको चौंका दिया है। हालांकि उनके बयान से पर्सलन लॉ बोर्ड काफी खफा है। दरअसल, मौलाना ने राम मंदिर पर सुलह का फॉर्मूला सुलझाया था जिस कारण उन्हें मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) से निकाल दिया गया है। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया था और मस्जिद को दूसरी जगह शिफ्ट करने का फॉर्मूला सुझाया था, जिसके बाद से बोर्ड उनसे नाराज चल रहा था।

बोर्ड ने नदवी के खिलाफ जांच के लिए एक समिति गठित की थी, जिसकी सिफारिशों के बाद यह कदम उठाया गया। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य कासिम इलियास ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा, ‘बोर्ड अपने रुख पर अडिग है कि मस्जिद की जमीन किसी को गिफ्ट नहीं की जा सकती. सलमान नदवी इस एकमत राय के खिलाफ गए थे, इसलिए उन्हें बर्खास्त कर दिया गया है।’ वहीं सलमान हुसैनी नदवी ने कहा है कि बोर्ड तानाशाही रवैया अपना रहा है। नदवी ने लखनऊ में कहा कि वह अपने कोशिशें जारी रखेंगे और अयोध्या जाएंगे। उन्होंने कहा कि मैंने शुक्रवार को ही यह साफ कर दिया था कि मैं ऐसे बोर्ड का हिस्सा नहीं बन सकता।

बयान के बाद बोर्ड ने साफ कहा कि वह अपने पुराने रुख पर कायम है और मस्जिद के लिए समर्पित जमीन न तो बेची जा सकती, न उपहार में दी जा सकती और ना ही इसे त्यागा जा सकता है।

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