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बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती ने बृहस्पतिवार को भारतीय जनता पार्टी की केंद्र सरकार पर संविधान को विफल करने के षडयंत्र रचने का आरोप लगाया और कहा कि लोकतंत्र और वंचित वर्ग को ताकत देने वाले प्रत्येक संवैधानिक और स्वायत्तशासी संस्थाओं का दुरुपयोग किया जा रहा है। मायावती ने यहां पार्टी कार्यालय में संविधान निर्माता बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर आयोजित एक समारोह में कहा कि भाजपा की वर्तमान केन्द्र सरकार अपने पूरे शासनकाल में वंचित वर्गों की घोर उपेक्षा के साथ-साथ बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के संविधान को ही हर प्रकार से विफल करने के षडयंत्र  में ही लगी रही और इस क्रम में इन वर्गों के संघर्ष को ताकत तथा लोकतंत्र को शक्ति प्रदान करने वाले हर संवैधानिक और स्वायत्तशासी संस्थाओं का घोर दुरूपयोग करने का प्रयास किया।

उन्होंने कहा कि भाजपा की केन्द्र और राज्य सरकारों ने अपनी संकीर्ण जातिवादी तथा साम्प्रदायिक नीतियों और खासकर अपनी गरीब, मजदूर और किसान-विरोधी नीतियों और रवैयों पर अडियल रवैया अपनाकर अपने अहंकारी होने का ही परिचय दिया है। अभूतपूर्व संकट झेल रहे खेत, खेती और किसानों के मामलों में तो इस सरकार की नीति और रणनीति भी ऐसी ग़लत एवं अनुपयोगी रही है। देश के लगभग सभी राज्यों में किसान वर्ग के लोग काफी ज्यादा आक्रोशित और आन्दोलित हैं।

मायावती ने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने किसानों को बड़े-बड़े  लुभावने वायदों में बहकाने का प्रयास किया है लेकिन किसान काफी दुःख  झेलकर भी अपनी तन, मन की पूरी शक्ति के साथ सरकार की गलत नीति और रवैये के  विरोध करने के लिये राजधानी दिल्ली की सड़कों तक पर मार्च करके अपना  जबर्दस्त विरोध और आक्रोश जताते हैं। उन्होंने कहा कि फसल बीमा आदि के नाम  पर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है लेकिन सरकारी खजाने का अरबों रुपए  प्रीमियम चुकाने के नाम पर निजी क्षेत्र की बीमा कम्पनियों की झोली में  डाला जा रहा है। उन्होंने कहा कि भाजपा अपनी  घोर वादाखिलाफी  और  विफलताओं पर से लोगों का ध्यान हटाने के लिए राम मन्दिर अभियान में लग गये  हैं। केंद्र सरकार जनहित, जनकल्याण और देश निर्माण आदि की सारी संवैधानिक  कर्तव्यों और जिम्मेदारियों से मुक्त होकर मन्दिर निर्माण के कार्य में लगी  रहने पर कटिबद्ध लग रही है।

बसपा नेता ने कहा कि वोटों और चुनावी स्वार्थ की राजनीति में भाजपा के वरिष्ठ नेता हिन्दू देवी-देवताओं  और आस्थाओं को भी नहीं बख्श रहे है। ऐसे लोगों से आमजनता को बहुत ही सजग  और सतर्क रहने की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने  केन्द्र और विभिन्न राज्यों में अपने लम्बे शासनकाल के दौरान सर्वसमाज के  गरीबों, मजदूरों, किसानों और अन्य मेहनतकश आम जनता के साथ-साथ करोड़ों  दलितों, पिछड़ों और मुस्लिम एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों को कभी भी  ईमानदारीपूर्वक उनको आत्म-सम्मान तथा स्वाभिमान से जीवन व्यतीत करने का  संवैधानिक अधिकार नहीं दिया। केवल कागजी कार्रवाई आदि करके इन वर्गों के  असली राजनीतिक, शैक्षणिक और आर्थिक हितों पर कुठाराघात करती रही और इनके शिक्षा और नौकरी में आरक्षण की व्यवस्था को भी लगभग निष्प्रभावी बनाया।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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