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भूमि सुधार और उद्यान मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने धान की खरीद में होने वाले फर्जीवाड़े का खुलासा किया। धान के नाम पर दो ऐसी जगहों पर धान की खरीद हो रही थी, जहां धान की पैदावार ही नहीं है। धान खरीद के लिए जब मंत्री साहब ने किसानों को फोन किया तो दो किसानों को छोड़कर बाकी सभी किसान फर्जी निकले, ये देख मंत्री ने आन-फानन में मामले की जांच करना शुरु किया।

दरअसल, तिवारी जिले के विभिन्न विभागों के कार्यो का निरीक्षण करने निकले तो उन्हें धान की खरीद को लेकर हो रहे बहुत बड़े फर्जीवाड़ें का सामना करना पड़ा। तिवारी शनिवार को जिले के विभिन्न विभागों के कार्यो का निरीक्षण करने निकले थे। चितबड़ागांव मंडी स्थित क्रय केंद्र पर जब उन्होंने धान खरीद के रजिस्टर की जांच की। रजिस्टर की जांच करने के बाद उन्होंने धान बेचने वाले किसानों को फोन मिलाना शुरू किया तो अजीबोगरीब स्थिति से उन्हें दो-चार होना पड़ा।

तिवारी ने रजिस्टर में दर्ज दो दर्जन से अधिक किसानों के नंबर पर फोन मिलाया। इसमें केवल दो किसानों को छोड़ सभी फर्जी मिले। क्रय केंद्र के रजिस्टर में ऐसे क्षेत्र के किसानों से धान खरीद दिखाई गई है, जहां धान होता ही नहीं है।

उमरपुर दियारे में धान की फसल नहीं होती है, वहां की खतौनी पर सैकड़ों कुंतल धान की खरीद दिखायी गयी है। मंत्री ने अपर जिलाधिकारी को मार्केटिंग इंस्पेक्टर पर मुकदमा दर्ज कराने का निर्देश दिया। उन्होंने अभियान चलाकर क्रय केंद्रों का सत्यापन करने को भी कहा है। खास बात यह है कि मंत्री जब चितबड़ागांव मंडी पहुंचे तो क्रय केंद्र बंद था। इस पर मंत्री ने माकेर्टिंग इंस्पेक्टर से पूछा तो वह बहानेबाजी करने लगे। इसके बाद उन्होंने अभिलेख तलब कर रैंडम चेकिंग शुरू की तो गड़बड़ी मिली।

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