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आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के खिलाफ मोदी सरकार अब सख्त रवैया अपना रही है। मंगलवार को गृह मंत्रालय ने दो महिला IPS अधिकारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। बता दें कि दोनों महिला IPS लम्बे समय से अपनी ड्यूटी से बिना बताए गायब थीं । दोनों महिलाओं के ऊपर फर्जी मुठभेड़ का आरोप है। जिसमें 1993 बैच की उत्तराखंड कैडर की आईपीएस ज्योति बेलूर शामिल हैं और दूसरी अधिकारी का 1991 बैच की आईपीएस मारिया लुई फर्नांडिस हैं।

इस मामले की गंभीरता को समझते हुए कुछ सप्ताह पहले गृह मंत्रालय नें यूटी कैडर के 1998 बैच के अधिकारी मयंक शील चौहान और 1992 बैच के छत्तीसगढ़ कैडर के अधिकारी राजकुमार देवांगन को भी उनके पद से हटा दिया था।

आप को बता दें इन दोनों महिलाओं में से एक महिला ज्योति बेलूर के खिलाफ गाजियाबाद के भोजपुर में हुए फर्जी एनकाउंटर का भी आरोप हैं। वर्ष 1996 में हुए इस एनकाउंटर में पुलिस ने 4 लोगों को मार गिराया था। हालांकि बाद में मामले की सीबीआई जांच हुई, तो पुलिस के झूठे दावे निकले और एनकाउंटर फर्जी पाया गया। गाजियाबाद में 1996 में हुए फर्जी एनकाउंटर में बेलुर का नाम सामने आया था। मारे गए व्यक्ति के शरीर से बरामद एक गोली बेलुर की रिवाल्वर से फायर की गई थी। उस वक्त वह मोदीनगर में सर्किल अधिकारी के रूप में तैनात थीं। इस केस में उन्हें कई बार कोर्ट में बुलाया गया, लेकिन वह कभी उपस्थित नहीं हुईं, फिलहाल वह देश से बाहर हैं।

फर्जी एनकाउंटर के केस में थाना प्रभारी समेत पांच पुलिसवाले आरोपी बनाए गए थे। जिसमें से एक पुलिसवाले की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी चारों पिछले दिनों उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है। हालाकिं कोर्ट ने बेलूर के खिलाफ गैरजमानती वारंट जारी कर पकड़ने का आदेश दिया हैं। तो वहीं दूसरी ओर पुलिस सेवा से बर्खास्त हुईं दूसरी अधिकारी मारिया लुई फर्नांडिस 2005 से ही नौकरी से नदारद थी और सरकार को बिना बताए अमेरिका में रह रही थी।

आधे दर्जन आईपीएस और आईएएएस के खराब प्रदर्शन से बर्खास्त होने का मामला यह अकेला नहीं है, आने वाले दिनों में कई और अधिकारियों पर गाज गिर सकती है। पीएम मोदी के सीधे आदेश के बाद इस दिशा में पहल तेज हो गई है। इनमें से 110 के लगभग दो दर्जन गुमशुदा आईएएस अधिकारी भी हैं, जो कि पिछले कुछ सालों से बिना सूचना के गायब हैं।

और अब मोदी सरकार की इस पहल के बाद अन्य आईएएस और आईपीएस अधिकारी सरकार की रडार पर हैं। वैसे सरकार की तरफ से उठाया गया ये कदम इस मुद्दे की गंभीरता को दर्शता है।

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