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किसानों की आय को बढ़ाने के लिए मोदी सरकार लगातार प्रयासरत है। इसके लिए वो अपना कदम दर कदम बढ़ाते जा रही है। ऐसे में उम्मीद यही है कि किसानों से उनकी आय को दोगुना करने का किया गया वादा वो धीरे-धीरे पूरा कर लेगी। बता दें कि 2019 आम चुनाव से पहले बजट की घोषणा पर अमल करते हुए मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी सौगात दी है। लागत मूल्य से 50 फीसदी अधिक दाम देने के वादे के तहत केंद्रीय कैबिनेट ने खरीफ फसलों के नए समर्थन मूल्य को मंजूरी दी है। केंद्र ने  धान के समर्थम मूल्य में 200 रुपये का इजाफा कर दिया है। आज कैबिनेट बैठक में सरकार ने खरीफ फसल की MSP बढ़ाने का फैसला लिया है। यह बढ़ोत्तरी बीते दस सालों में सर्वाधिक है।  कैबिनेट ने बुधवार को इसे मंजूरी दी। इससे पहले 2008-09 में धान की एमएसपी 155 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाई गई थी।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि किसानों को अब खरीफ की फसल का डेढ़ गुना एमएसपी किया गया है। राजनाथ ने कहा कि किसानों को फसल की सही कीमत मिलेगी। अब किसानों को धान की फसल पर एमएसपी 1750 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है। पिछले साल यह 1550 रुपये थी। बजट में सरकार ने कहा था कि एमएसपी उत्पादन लागत का कम से कम 1.5 गुना तय किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि ज्यादा एमएसपी से धान का उत्पादन और बढ़ सकता है। 2017-18 में यह 11.1 करोड़ टन के साथ सबसे उच्च स्तर पर पहुंच गया। एमएसपी की घोषणा सीजन शुरू होने से पहले होती है।

मक्के के समर्थन मूल्य को 1425 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1700 रुपये किया गया। मूंग की एमएसपी को 5575 रुपये से बढ़ाकर 6975 रुपये प्रति क्विंटल किया गया। उड़द के न्यूनतम समर्थन मूल्य को 5400 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 5600 रुपये किया गया।  गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आजाद भारत के इतिहास में न्यूनतम समर्थन मूल्य में इतनी बड़ी वृद्धि की गई। उन्होंने कहा, ‘किसान देश का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन उन्हें कभी भी अपने उत्पाद की सही कीमत नहीं मिली। किसानों में हताशा और निराशा थी इसे प्रधानमंत्री मोदी ने समझा।’

~देव कुमार गुप्ता

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