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दलितों के उत्पीड़न और आरक्षण पर चल रही देशव्यापी बहस के बीच अब इस मसले पर एक और नया बयान सामने आया है. मोदी कैबिनेट में मंत्री ने देश की ऊपरी अदालतों में लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए उनमें आरक्षण की मांग की है… उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दलित-आदिवासी और पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं है. … कुशवाहा ने दलील दी की इसीलिए इन अदालतों से दलित विरोधी फैसलों की भरमार है…

Modi's minister has demand for reservation in the appointment of judgesमोदी कैबिनेट में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने देश की ऊपरी अदालतों में लोकतंत्र पर सवाल उठाते हुए इन जगहों पर आरक्षण की मांग की है…कुशवाहा ने कहा कि जब तक देश की अदालतों में आरक्षण लागू नहीं होगा तब तक दलितों के खिलाफ फैसले आते रहेंगे…ये आरोप उपेंद्र कुशवाहा ने पटना में केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी द्वारा आयोजित बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की 127 वी जयंती के मौके पर लगाया…उन्होंने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में दलित-आदिवासी और पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं है. कुशवाहा ने प्रतिनिधित्व को आधार बताते हुए कहा कि इसीलिए इन अदालतों से दलित विरोधी फैसलों की भरमार है…

कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति में आरक्षण नीति को लागू करने की मांग की…उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों की नियुक्ति में आरक्षण लागू करने की कोशिश की थी…लेकिन सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने इसे सिरे से खारिज कर दिया…

हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चार जजों ने खुद मीडिया के सामने आकर सुप्रीम कोर्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे….और अब सियासदानों ने भी न्यायिक व्यवस्था और सुप्रीम कोर्ट को कटघरे में खड़ा करना शुरू कर दिया है…

एपीएन ब्यूरो

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