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राफेल लड़ाकू विमानों के ऑफसेट समझौते को लेकर विवादों में फंसी अनिल अंबानी की रिलायंस समूह की कंपनी आरएनईएल पर अब नौसेना ने जुर्माना लगाया है और पांच समुद्री गश्ती पोत की आपूर्ति समय पर न करने के लिए उसकी बैंक गारंटी जब्त कर ली है। नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने नौसेना दिवस की पूर्व संध्या पर सोमवार को यहां आयोजित संवाददाता सम्मेलन में सवालों के जवाब में इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “रिलायंस नेवल एंड इंजीनीयरिंग लिमिटेड (आरएनईएल) के साथ किसी तरह की रियायत नहीं बरती जा रही है। उसकी बैंक गारंटी जब्त कर ली गयी है, हालांकि उसके साथ अनुबंध अभी रद्द नहीं किया गया है। इसकी जाँच की जा रही है और इस पर आगे के कदम के बारे में निर्णय लिया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि रिलायंस डिफेंस के ऋणों की भुगतान की सूची फिर से बनाने की प्रक्रिया चल रही है और उसके बैंकर आईडीबीआई ने उसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है।अब इस सौदे में केवल लार्सन एंड टूब्रो के रह जाने की संभावनाओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों से भी इस बारे में बात की जा सकती है।

आईएनईएल को 2,500 करोड़ रुपये के अनुबंध के तहत नौसेना को पांच समुद्री गश्ती पोत की आपूर्ति करनी थी, लेकिन वह इस सौदे को निर्धारित समय में अमली जामा पहनाने में विफल रही है।

उल्लेखनीय है कि रिलायंस समूह की कंपनी रिलायंस डिफेंस को फ्रांस से वायु सेना के लिए खरीदे जाने वाले 36 राफेल लड़ाकू विमान के सौदे में भारतीय ऑफसेट भागीदार बनाया गया है। विपक्षी दलों ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी हिन्दुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) को दरकिनार कर रिलायंस डिफेंस को ऑफसेट ठेका दिलावाया है।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

 

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