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महज चंद पैसों के लिए अगर किसी की जिंदगी बर्बाद कर दी जाए तो शायद इससे बड़ा अपराध हत्या भी ना हो, लेकिन जिस देश में लड़कियों को देवी का रूप मान कर उनकी पूजा की जाती हो उसी देश में मात्र चंद पैसों के लिए अगर कुछ दलाल अपना ईमान गिरवी रख कर महिलाओं का ही सौदा करें, तों फिर किस बात की इंसानियत, लेकिन इन सबसे हट के दिल तब दहल जाता है, जब देह व्यापार कराये जाने के बाद भी पैसों की भूख पूरी नहीं होती और फिर खिंचवा ली जाती है, शरीर के ऊपर की परत वाली चमड़ी भी। ये स्थिति कितनी भयावह होगी इसके अंदाजे मात्र से रूह कांप जाती है, लेकिन इतने के बावजूद भी हैवानों की रूह नही पसीझती।

वाकया देश की राजधानी दिल्ली का है, जहां के छावला थाना क्षेत्र के अंर्तगत कुतुब विहार और श्याम विहार से 12 नेपाली लड़कियों को बरामद किया गया। ये लड़कियां नेपाल से नौकरी दिलाने के बहाने धोखे से पहले भारत लायी गयी फिर यहां से इन्हें खाड़ी देशों में बेच कर देह व्यापार करवाने की योजना थी, जिसके लिए इन लड़कियों को 2 महीने पहले दिल्ली लाकर यहां से म्यांमार के रास्ते कुवैत, ईराक, और दुबई भेजने की तैयारी चल ही रही थी, लेकिन वक्त रहते इन्हें दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली पुलिस, और भारत स्थित नेपाली दूतावास के साथ नेपाल की सामाजिक संस्था किन नेपाल, सहयोग से इन्हे दरिंदों के चंगुल से छुड़ा लिया गया। जिसके साथ ही एक दलाल के खिलाफ FIR  भी दर्ज करायी गयी है और अब पुलिस पूरे मामले में गिरफ्तारी और पूरे रैकेट की पकड़ के लिए की जांच में जुट चुकी है।

किन इलाकों से लाया गया था इन्हें
नेपाल से छुड़ायी गयी इन लड़कियों को नेपाल के अलग-अलग इलाकों से लाया गया था। साथ ही इनके गरीब  परिवार वालों को इस तरह से झांसे में रखा गया था कि उन मासूमों को ये तक नही पता था कि शायद ये अब कभी भी अपनी बच्चियों को नही देख पायेंगे, लेकिन वक्त रहते इन्हें बंधकों से रिहा करा लिया गया। फिलहाल ये लड़किया नेपाल के इन इलाकों से थी-

  • धादिंग से – 3 लड़कियां
  • झापा से – 2 लड़कियां
  • मकवानपुर से -2 लड़कियां
  • दांग से -2 लड़कियां
  • धनगढ़ी से – 1 लड़की
  • प्यूठान से – 1 लड़की
  • रसुवा से -1 लड़की

किस तरह से बचाया गया इन्हें
इसी तरह नेपाल की रहने वाली कोमल (परिवर्तित नाम) को कुछ वर्षो पहले ऐसे ऐजेंट ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर नेपाल से लेकर भारत आया फिर भारत से खाड़ी देशों मे देह व्यापार के लिए बेच दिया गया। किसी तरह कोमल (परिवर्तित नाम) खाड़ी देश में कुछ समय बिताने के बाद भारद वापस आ गयी और फिर यहां उसने प्रयास करके बाकी लड़कियों कि जिंदगी नर्क होने से बचा ली।

घरों से लाने के भी लेते थे पैसे
दरिंदों के चंगुल से किसी तरह आजाद हुयी कोमल (परिवर्तित नाम) ने ही बताया कि ये ऐजेंट घरों से लड़कियों को लाने से पहले उन्हें और उनके परिवार वालों को कोई शक ना हो इसके लिए नौकरी दिलवाने के लिए जरुरी काग़ज बनवाने के नाम पर लड़कियों के घर वालों से पैसे भी लेते थे।

म्यांमार के रास्ते खाड़ी देशों को पहुंचती थी लड़कियां
इन लड़कियों को म्यांमार के जरिये खाड़ी देशों तक पहुंचाया जाता था, जिसके लिये बकायदा उनके भारतीय होने के जाली दस्तावेज तैयार किये जाते थे, जिससे किसी को शक ना हो।

ब्रेन वाश कर नेपाल से लाया जाता था
इन लड़कियों को नेपाल से लाये जाने से पहले इनका इस तरह ब्रेन वाश कर इन्हे धोखे में रखा जाता था कि ये पहले भारत और फिर म्यांमार होते हुए खाड़ी देशों में पहुंचने तक के पूरे रास्ते कही भी अपना मुंह नही खोलती थी।  

देह व्यापार के बाद खींचवा ली जाती है चमड़ी
सुनने में ही दिल दहला देने वाला ये शब्द नेपाली लड़कियों की जिंदगी ही खत्म कर देता है, इनसे देह व्यापार करवा लेने के बाद महज पचास हजार से एक लाख रूपये के लिये ही इनकी शरीर की उपरी परत की चमड़ी भी उतरवा ली जाती है, दरअसल चमड़ी ट्रांसप्लांट के जरिये ही त्वचा को अपनी वास्तविक उम्र से कम किया जा सकता है। वहीं नेपाली महिलाओं की त्वचा बहुत ही साफ और सुदंर होती है, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों के बाजार में नेपाली महिलाओं की मांग भी रहती है।

अब दिल्ली पुलिस के पहुंच से दूर के इलाकों में चलता है व्यापार
पिछले कुछ सालों से मानव तस्करी को लेकर दिल्ली पुलिस की सख्ती के बाद से देह व्यापार और मानव तस्करी करने वालों के रैकेट दिल्ली के पॉश इलाकों से हट कर दिल्ली से ही सटे, लेकिन थोड़ी दूर स्थित गांवों में चल रहें है जहां ये दिल्ली पुलिस और अन्य सरकारी एजेंसियों से बच सकें।

-सौरभ द्विवेदी

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