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देश में शायद ही ऐसा कोई साल हो जो चुनावों के दौर के बिना शांति से गुजर जाए। ऐसे में देश के सभी महत्वपूर्ण मुद्दे डस्टबिन में चले जाते हैं और पूरी मीडिया, प्रशासन और खुद सरकार राजनीति में लग जाती है। इससे देश का समय, पैसा, व्यवस्था, योजनाएं आदि कई चीजें अधर में चली जाती है और बचा रह जाता है तो सिर्फ झूठ के वादे और कूटनीति से भरी ‘राजनीति’। केंद्र की मोदी सरकार इसी के खिलाफ है। मोदी सरकार चाहती है कि आने वाले भविष्य में लोकसभा और विधानसबा चुनाव एक साथ करवाएं जाएं ताकि जनता और सरकार दोनों का समय बच सकें और 5 साल तक देश में चुनावी झंझट से बच सके। लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मोदी सरकार और इस नीति को झटका देते हुए नजर आ रहे है।

नीतीश कुमार ने पटना में आयोजित एक नेशनल कॉंन्फ्रेंस में कहा कि राज्य चुनाव और लोकसभा चुनाव एक साथ होने की कोई संभावना नहीं है। गुजरात और कर्नाटका जैसे राज्यों के लिए एक साथ होने वाले चुनाव संभव नहीं है। बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यों और लोकसभा चुनाव एक साथ करने का आइडिया दिया था।

उन्होंने कहा कि “बिहार विधानसभा चुनाव अपने समय पर साल 2020 में अक्टूबर-नवंबर में ही होंगे और जैसा कि मीडिया में अफवाह है कि अगले साल चुनाव आयोजित किए जाएंगे तो ऐसा नहीं होगा।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अगर वे एक साथ चुनाव करने के आइडिया का समर्थन करते हैं तो यह संभव नहीं होगा। नीतीश ने कहा “क्या आप यह सोच सकते हैं कि जहां गुजरात में अभी चुनाव हुए हैं, वहां पर अगले साल फिर से चुनाव हों, या कर्नाटका में जहां कुछ ही महीनों में चुनाव हैं वहां फिर से अगले साल चुनाव कैसे संभव है।”

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आपको बता दें कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और लेफ्ट जैसी पार्टियां काफी समय से एक साथ सभी चुनाव के आइडिया को लेकर बीजेपी से सवाल कर रही हैं। इतना ही नहीं विपक्षी पार्टियों का यह भी कहना है कि अगर एक साथ चुनाव होते हैं तो यह संघीय सिद्धांतों के खिलाफ होगा।

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