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बीते दिन दिल्ली के जंतर-मंतर पर तेजस्वी यादव ने बिहार के मुजफ्फरपुर शेल्टर होम रेप केस में जमकर शक्ति प्रदर्शन किया। विरोध के कुनबे में जुटे तमाम नेताओं राहुल गांधी, शरद यादव से लेकर केजरीवाल तक ने जमकर अपने सियासी तरकश से अग्निबाण निकाले और उसका मुंह नीतीश और बीजेपी की तरफ मोड़ दिया। ये पूरी कवायद साल 2019 के चुनावी महाभारत को ध्यान में रखकर की गई।

बेटियों के गुनहगारों को सजा, कोई नहीं बचेगा

जंतर-मंतर पर जुटे विपक्ष ने मोदी और उनके सहयोगियों को धूल चटाने के लिये एकजुटता दिखाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। शेल्टर होम की नाबालिग बेटियों के साथ हुई हैवानियत पर खूब सियासी जमा खर्च किये गये। तेजस्वी ने नीतीश की आत्मा के सोये रहने तक की बात कह दी थी। राहुल ने नीतीश को कह दिया था कि, शर्म है तो वह दोषियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करें। इसके बाद सुशासन बाबू के कलेजे में आग लगना स्वाभाविक था। विपक्ष के चौतरफा दबाव के बीच सूबे के सीएम नीतीश कुमार उबल उठे कहा, किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। जो भी गड़बड़ करेगा वो जेल जाएगा, फिर चाहे वह कोई भी हो।

मास्टरमाइंड ब्रजेश ठाकुर पर कसा शिकंजा

बिहार में बेटियों के साथ हैवानियत का नंगा नाच खेला गया। इसे मीडिया ने खूब दिखाया है जिससे कि बेटियों की जिंदगी और मासूमियत के सौदागरों को उनके गुनाहों की सजा मिल सके। क्योंकि मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में 34 लड़कियों के साथ हुई दरिंदगी के मामले ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। इसे लेकर देशभर में उबाल है। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने गैर सरकारी संगठन सेवा संकल्प एवं विकास समिति के संचालक बृजेश ठाकुर की नीतीश से करीबी बताने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। जबकि जेडीयू इसे नकारती हुए कहा है कि, शराब और बालू माफिया के दबाव में आरजेडी नीतीश का इस्तीफा मांग रही है। वहीं सरकार नेबलात्कार मामले में मुख्य आरोपी बृजेश ठाकुर का आर्म्स लाइसेंस रद्द कर दिया है। लेकिन, आरजेडी के ये आरोप सुशासन बाबू का पर्याय बन चुके नीतीश के लिये किसी सदमे से कम नहीं है।

सीबीआई जांच से सच सामने आने की उम्मीद

उम्मीद है कि सीबीआई जांच में पूरा सच सामने आएगा। बेटियों की अस्मत के ठेकेदारों को उनके अंजाम तक पहुंचाया जाएगा। लेकिन सवाल ये भी है कि, मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में मासूम बच्चियों के साथ हैवानियत की खबर सरकारी अमले को एक बड़े एनजीओ से ही क्यों मिली साथ ही समय रहते ऐक्शन में कहां चूक हुई। ऐसे में वक्त सियासत का नहीं बेटियों को इंसाफ दिलाने के लिये एकजुट होने का है क्योंकि सियासत कभी खत्म नहीं होती। वैसे भी साल 2019 का राजनीतिक महाभारत सभी दलों का इंतजार कर ही रहा है। तब जोर लगाने से किसी दल को किसने रोका है।

एपीएन ब्यूरो

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