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अगले तीन सालों के भीतर बैंक शाखाओं की जरूरत न के बराबर हो सकती है। लोगों को वित्तीय काम के लिए बैंक में जाने की जरूरत भी न पड़े। सारे काम ऑनलाइन हुआ करेंगें। आने वाले तीन सालों में हो सकता है कि बैंक शाखाओं का अस्तित्व भी खत्म हो जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि डेटा की खपत और विश्लेषण से वित्तीय समावेशन को रफ्तार मिलेगी।

नीति आयोग के सीईओ अमिताभ कांत ने 18 जनवरी को इंडिया डिजिटल के समिट में कहा कि भौतिक रूप से बैंक और उनकी शाखाओं में जाना अगले तीन साल में अप्रासंगिक हो जाएगा, क्योंकि डेटा विश्लेषण से वित्तीय समावेशन को और गति मिलेगी। कांत ने कहा कि बैंकों की शाखाओं में जाना खत्म हो जाएगा। इसका कारण बड़े पैमाने पर डेटा का उपयोग तथा डेटा विश्लेषण है।

आगे उन्होंने कहा कि भारत एकमात्र देश है, जहां एक अरब से अधिक लोगों को आधार कार्ड (बायोमेट्रिक) जारी किए गए हैं। अगले तीन साल में भारत में एक अरब से अधिक स्मार्टफोन होंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि देश में मोबाइल डाटा खपत अमेरिका और चीन के संयुक्त डेटा खपत से अधिक है।

वहीं अमिताभ बोले कि देश में करीब 400 मिलियन स्मार्टफोन यूजर्स हैं। आज भी देश के 85 फीसदी स्मार्टफोन इंटरनेट की पहुंच से दूर हैं लिहाजा इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के लिए यहां एक बड़ा अवसर है। वर्ष 2025 तक इस अवसर के करीब 4.47 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है। आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस ही अकेला 2.04 लाख करोड़ रुपये के अवसर पैदा करने में सक्षम हैं।

इस दौरान पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा ने कहा कि दुनिया में नया बैंकिंग मॉडल भारत से आएगा और पेटीएम भारत मॉडल का शुरुआती उदाहरण होगा।

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