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कांग्रेस ने चुनाव के दौरान सरकार बनने पर किसानों की कर्जमाफी और बेरोजगारों को बेरोजगारी भत्ता देने की घोषणा की थी। सरकार बनने के बाद किसानों की कर्जमाफी का एलान हो गया। जिसके बाद अब बेरोजगारी भत्ते की सुगबुगाहट से युवाओं ने रोजगार कार्यालय का रुख किया है।

राजस्थान में बेरोजगारों की बड़ी फौज रोजगार के लिए कतार में लगी हुई है। प्रदेश में सरकार बनाने वाली कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में बेरोजगारों को साढ़े तीन हजार रुपए महीने का बेरोजगारी भत्ता देने का वादा किया था। सरकार बनने के बाद से ही प्रदेश के रोजगार कार्यालय इन दिनों बेरोजगारों की कतार लगी हुई हैं।

प्रदेश के सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार मौजूदा समय में 6 लाख 16 हजार 706 बेरोजगार पंजीकृत हैं। बेरोजगारी भत्ते के वादे के बाद तो अब इस संख्या में इजाफा हो रहा है। बेरोजगारों के बढ़ते पंजीकरण में सरकार की पेशानी पर बल ला दिए हैं। सरकार गठन के बाद नंवबर में जहां 6050 युवाओं ने पंजीकरण कराया था, वहीं दिसंबर में यह संख्या दोगुनी हो गई और 13013 बेरोजगारों ने पंजीकरण कराया।

बेरोजगार युवाओं को लगता है कि भत्ता मिलने से उन्हें थोडी राहत जरूर मिलेगी। बेरोजगार युवाओं को उम्मीद है कि सरकार लोकसभा चुनाव से पहले अपने इस वादे पर अमल करेगी। दूसरी ओर, सरकार में इस वादे को पूरा करने की कवायद भी चल रही है। प्रदेश के श्रम विभाग का कहना है कि बेरोजगारी भत्ता देने के नियम और प्रावधान निर्धारित करने के लिए सरकार के स्तर पर ही किसी समिति का गठन होगा और उसके बाद ही इस बारे में कोई फॉर्मूला तय हो पाएगा।

श्रम विभाग का कहना है कि उनके जिला रोजगार दफ्तरों में बेरोजगारों के पंजीकरण में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। विभाग के अनुसार जिलों से मिल रही सूचनाओं के मुताबिक प्रतिदिन युवा पंजीकरण के लिए रोजगार कार्यालय पहुंच रहे है और निश्चित तौर पर जब भत्ता देने की योजना लागू होगी, तब तक पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या मौजूदा आंकड़ों को पार कर जाएगी।

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