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मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के टीचिंग हॉस्पिटल की एक महिला डॉक्टर को सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही एक बच्चे की मौत को लेकर जांच भी शुरू कर दी गई है। बता दें कि डॉक्टर को बच्चे के माता-पिता के साथ गलत व्यवहार करने और इलाज में देरी करने के लिए सस्पेंड कर किया गया है।

दरअसल, यह कार्रवाई सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल होने के बाद की गई है। इस वीडियो में दिख रहा है कि एक डॉक्टर बच्चे के माता-पिता से बार-बार कह रही है कि अस्पताल प्रशासन के अनुसारक करोड़ रुपये के वेंटिलेटर का इंतजाम करो क्योंकि अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं है।

ये मामला एक साल की अंशिका अहिरवार का है, जो गर्म पानी के पॉट में गिर गई थी। जिसके कारण वह 70 फीसदी तक जल गई। उसे इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था।

मृतक बच्ची के रिश्तेदार का कहना है, “डॉक्टरों ने बच्ची का इलाज नहीं किया। वह बच्ची को निजी अस्पताल ले जाने को कह रहे थे। हमने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। डॉक्टर ज्योती राउत बच्ची का इलाज करने आई थी।

गुस्से में डॉक्टर ने बोला कि बच्ची को वेंटिलेटर की जरूरत है क्योंकि बच्ची को इसकी जरूरत है लेकिन वह अस्पताल में काम नहीं कर रहा है। इसके बाद वह कहने लगी कि अस्पताल में वेंटिलेटर नहीं है और उसने कहा कि वह बच्ची का इलाज तभी करेंगे जब एक करोड़ रुपये के वेंटिलेटर का इंतजाम होगा। अस्पताल की उदासीनता और डॉक्टरों ने बच्ची की जान ले ली।”

वहीं जिला युवा कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल, जिला इकाई के अध्यक्ष अशरफ खान ने रविवार को मेडिकल कॉलेज के डीन को ज्ञापन सौंपा है और अस्पताल स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। ये लोग भी बच्ची की मौत के लिए अस्पताल स्टाफ को ही जिम्मेदार मानते हैं।

वहीं मामले पर डॉक्टर ज्योति राउत ने कहा कि, “ये वीडिया क्लिप एडिटिड है और इसमें पूरी बातचीत नहीं दिखाई गई है। मैं बच्ची के रिश्तेदारों से घिरी हुई थी और वे मुझपर अन्य डॉक्टरों को बुलाकर उसे इलाज देने के लिए अनावश्यक दबाव बढ़ा रहे थे। वहां कोई सिक्योरिटी नहीं थी। मुझसे जितना हो पाया मैं उतना बच्ची का इलाज किया।

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