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कभी किसी ने नहीं सोचा होगा कि किसी सेक्स मामले को लेकर साहित्य के नोबेल पुरस्कार पर खतरा मंडराने लगेगा। लेकिन ऐसा हुआ है। जी हां, नोबेल पुरस्कार प्रदान करने वाली संस्था के सैक्स स्कैंडल में फंसने के कारण इस साल साहित्य में नोबेल पुरस्कार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। फ्रेंच फोटोग्राफर जौं क्लोड अरनॉल्ट के कथित यौन दुराचार को लेकर स्वीडिश एकेडमी आलोचनाओं के घेरे में है। ऐसे में एकेडमी ने ये फैसला किया है कि इस साल यह पुरस्कार प्रदान नहीं किया जाएगा क्योंकि एकेडमी के कुछ सदस्य पुरस्कार प्रदान करने को लेकर चिंतित हैं और वे इसके लिए स्थिति को अनुकूल नहीं बता रहे हैं।

बता दें कि पुरस्कार के वितरण को लेकर नोबेल देने वाली संस्था के भीतर आपसी लड़ाई चल रही है जिसके केंद्र में एक सेक्स स्कैंडल है। इसी विवाद ने लिट्रेचर में नोबेल देने वाले पैनल को ये फैसला लेने पर मजबूर किया है कि इस साल ये पैनल किसी कैंडिडेट का नाम तय नहीं करे। स्वीडन स्थित इस एकेडमी ने कहा है कि ये पुरस्कार अगले साल तक के लिए स्थगित रहेंगे. अगले साल एक साथ दो विजेताओं को चुना जाएगा। ये इसलिए भी ऐतिहासिक होगा क्योंकि दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार ऐसा किया जाएगा कि एक साथ दो विजेताओं को लिट्रेचर में नोबेल दिया जाए।

खबरों के मुताबिक,  मी टू  कैंपेन ने एकेडमी के अंदर इस भूचाल की शुरुआत की थी। इसी कैंपेन का हिस्सा बनते हुए साल 2017 के नवंबर में 18 महिलाओं ने कला जगत के दिग्गज जीन क्लाउडे अरनॉल्ट पर यौन हिंसा का आरोप लगाया था।

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