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बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और अनुराग ठाकुर ने दुबई में एक अक्टूबर को होने वाले आईसीसी की तीन दिवसीय सुनवाई से अलग कर लिया है। आईसीसी पाकिस्तान की उस याचिका की सुनवाई कर रही है जिसमें पाक क्रिकेट बोर्ड ने भारत द्वारा दो बार द्विपक्षीय सीरीज रद्द करने के एवज में 500 करोड़ रुपये हर्जाने की मांग की है। पिछले साल लोढ़ा समिति के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट ने श्रीनिवासन और ठाकुर को भारतीय क्रिकेट प्रशासन से हटा दिया था। बोर्ड के उस वक्त के अध्यक्ष अनुराग ठाकुर को उनके पद से हटाने के बाद अदालत ने विनोद राय की अगुआई में प्रशासको की समिति बनाकर उस बोर्ड में लोढ़ा कमेटी की सिफारिशो को लागू कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

बीसीसीआई ने तीन सदस्यीय आईसीसी विवाद समाधान समिति का सामना करने के लिए कई गवाहों को बुलाया है, जिसका नेतृत्व अंग्रेजी बैरिस्टर माइकल बेलॉफ करेंगे, जो आईसीसी आचार संहिता आयोग के अध्यक्ष भी हैं। इस मामले में बीसीसीआई ने यूके स्थित अंतरराष्ट्रीय कानून फर्म हर्बट स्मिथ फ्रीहिल्स और खेल विवाद विशेषज्ञ इयान मिल को हायर किया है। गवाहों में श्रीनिवासन, ठाकुर और पूर्व बीसीसीआई सचिव संजय पटेल हैं। इन्होंने 2014 में एमओयू पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें 2015 और 2023 के बीच पाक और भारत के बीच छह द्विपक्षीय सीरीज निर्धारित किए गए थे। इसमें पीसीबी 2015/16 में पहली सीरीज की मेजबानी कर रहा था।

पूर्व बोर्ड अध्यक्ष अनुराग ठाकुर ने कहा, “भारत ने न्यायिक सुनवाई में शामिल होकर में कुछ भी गलत नहीं किया है। यह भारत और पाकिस्तान के बीच एक द्विपक्षीय मामला है; इसमें आईसीसी क्या कर रहा है? आईसीसी हमें खेलने के लिए मजबूर नहीं कर सकता है और बीसीसीआई पर कोई दबाव अंतरराष्ट्रीय संकट का कारण बन सकता है। ठाकुर ने कहा, पाकिस्तान को एक पैसा भारत नहीं देगा। बीजेपी सांसद ठाकुर ने कहा कि पहले पाकिस्तान आतंकवाद का खात्मा करे तब उसके साथ क्रिकेट खेलने पर सोचा जा सकता है। बीसीसीआई के पूर्व हाई-प्रोफाइल अधिकारी ने नाम छापने की शर्त पर कहा, सुनवाई में शामिल होना खराब निर्णय है।

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