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सीमा पर जारी तनाव के बीच ‘समझौता एक्सप्रेस’ दोबारा शुरू करने के बाद भारत–पाकिस्तान के रिश्ते को लेकर एक और अच्छी खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान का एक प्रतिनिधिमंडल करतारपुर कॉरिडोर के मसौदा समझौते पर चर्चा के लिए भारत आएगा। इसके बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी 28 मार्च को इस्लामाबाद के दौरे पर जाएगा। इस कदम को दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव घटाने में सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

पाकिस्तान ने मंगलवार को भारत को जानकारी देते हुए कहा कि उसका प्रतिनिधिमंडल करतारपुर मसौदा समझौते पर चर्चा के लिए 14 मार्च को भारत दौरे पर आएगा।

इसकी पुष्टी पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने की है और इस फैसले की जानकारी देने के लिए भारत के कार्यवाहक उच्चायुक्त गौरव अहलुवालिया को विदेश मंत्रालय बुलाया।

बयान में कहा गया, कि करतारपुर गलियारे के मसौदा समझौते पर चर्चा के लिए पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल 14 मार्च 2019 को नई दिल्ली के दौरे पर जाएगा।  जिसके बाद भारतीय प्रतिनिधिमंडल 28 मार्च 2019 को इस्लामाबाद का दौरा करेगा।

आपको बता दें कि पुलवामा अटैक और एयर स्ट्राइक के बाद बेहद तल्ख माहौल के बावजूद भारत ने पिछले हफ्ते ही कहा था कि वह करतारपुर पर होने वाली मीटिंग कैंसल नहीं करेगा। केंद्र सरकार पहले ही साफ कर चुकी है बालाकोट में इंडियन एयरफोर्स की एयर स्ट्राइक ‘सीमित और आतंक के खिलाफ’ कदम था।

गौरतलब है कि कुछ दिनों पहले पाकिस्तान के करतारपुर से भारत के गुरदासपुर जिले स्थित डेरा बाबा नानक गुरुद्वारे तक विशेष कॉरिडोर खोलने पर दोनों सरकारों के बीच सहमति बनी थी। करतारपुर में ही गुरु नानक देव जी ने जीवन का अंतिम समय बिताया था।

वहीं यह सकारात्मक घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब पाकिस्तान ने आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद समेत अन्य प्रतिबंधित आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की है। इन संगठनों को प्रतिबंधित संगठनों की सूची में डाला गया है। साथ ही आतंकी मसूद अजहर के भाई और बेटे समेत 44 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है।

इसलिए खास है करतारपुर साहिब
करतारपुर कॉरिडोर बनने के बाद श्रद्धालु खुद गुरुदासपुर जिले से करतारपुर साहिब जाकर दर्शन कर सकेंगे। सिखों के प्रथम गुरु गुरुनानक देव ने करतारपुर साहिब में अपनी जिंद़गी के 18 साल बिताए थे। करतापुर साहिब गुरुद्वारे को पहला गुरुद्वारा माना जाता है, जिसकी नींव श्री गुरु नानक देव जी ने रखी थी। हालांकि, बाद में रावी नदी में बाढ़ के कारण यह बह गया था। इसके बाद वर्तमान गुरुद्वारा महाराजा रंजीत सिंह ने बनवाया था।

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