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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां एक ओर प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़े-बड़े सुधार के तमाम दावे करती हो, वहीं दूसरी और स्वास्थ्य विभाग की लचर व्यवस्था इन सभी दावों की पोल खोल रही है। अस्पतालों में न तो डॉक्टर है और न ही मूलभूत सुविधाएं। योगी सरकार के दावों की पोल खोलने वाला एक ऐसा ही मामला आगरा से आया है। आगरा के एक अस्पताल में साढ़े तीन महीने के बच्चे के लिए स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं कराया गया। इतना ही नहीं,कड़ी धूप में बच्चे का पिता लगभग 500 मीटर तक ऑक्सीजन सिलेंडर कंधे पर रखकर अपने बच्चे की जान बचाने के लिए चलता रहा।

आगरा के जैतपुर के रहने वाले सूरज सिंह अपने मासूम बच्चे को लेकर एसएन मेडिकल कॉलेज में पहुंचेनवजात शिशु का पेट फूल रहा था और उसे सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। शुरुआती जांच के बाद बाल रोग विभाग ने बच्चे की अन्य जांच कराने के लिए माइक्रोबायॉलजी विभाग ले जाने को कहा। बाल रोग विभाग ने किसी वॉर्ड बॉय और स्ट्रेचर के न होने की बात कहकर किसी भी तरह की अन्य मदद से इनकार कर दिया और बच्चे को लिए ले जाने को कहा। यहां से बच्चे को लेकर मां-बाप सिलेंडर कंधे पर रख करीब 500 मीटर पैदल चलकर रेडियोडाइग्नोसिस विभाग पहुंचे। इसके बाद यहां बहुत कहने के बाद बच्चे की जांच हुई और फिर वे बाल रोग विभाग गए, जहां बच्चे को भर्ती किया गया।

वहीं जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान आया तो कॉलेज प्रशासन ने बाल रोग विभाग के वॉर्ड बॉय करामत अली को सस्पेंड कर दिया है और सिस्टर इन-चार्ज सरोज तथा स्टाफ नर्स शशि गौतम के लिए वॉर्निंग नोटिस जारी कर दिया है।

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