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मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौनशोषण मामले में सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने सीबीआई के डायरेक्टर को मॉनिटरिंग करने का निर्देश दिया। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से सूबे के आश्रय गृहों के बारे में पूरा ब्योरा पेश करने का निर्देश दिया।

मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह और न्यायाधीश डॉ रविरंजन की खंडपीठ ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह यौनशोषण मामले की सुनवाई करते हुए सीबीआई के डायरेक्टर को मॉनिटरिंग करने के साथ जरूरत के मुताबिक एसआईटी गठित करने का निर्देश दिया।

वहीं, मामले की जांच कर रहे सीबीआई के आरक्षी अधीक्षक के तबादले को लेकर भी सवाल उठाये। सीबीआई की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर कड़ी फटकार भी लगाई। वहीं, पीड़ित बच्चियों से महिला अधिक्ता ही पूछताछ करेंगी। जानकारी के मुताबिक अधिवक्ता प्रकृतिका शर्मा अब बच्चियों से पूछताछ करेंगी।

हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए निर्देश दिया कि राज्य सरकार आश्रय गृहों के बारे में को पूरा ब्योरा पेश करे। हाईकोर्ट ने मामले की जांच में तेजी लाने का निर्देश देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तिथि सुनिश्चित कर दी।

सोमवार (27 अगस्त) को भी सुनवाई हुई थी, जिसमें सीबीआई ने पटना हाईकोर्ट में एक रिपोर्ट जमा की थी। इस मामले में और कागजात पेश करने लिए कहा गया था।

इससे पहले हुई सुनवाई में पटना हाईकोर्ट ने मुजफ्फरपुर रेप कांड और सीबीआई जांच से संबंधित खबरें मीडिया को रिपोर्टिंग करने पर रोक लगा दी। वहीं, इस आदेश पर विरोध भी जाता गया था। मुख्य न्यायाधीश मुकेश आर शाह ने रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के लिए तर्क दिया था कि आरोपियों को अग्रिम रूप से लाभ मिलने की आशंका रहती है।

उन्होंने कहा, मैं अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया के खिलाफ नहीं हूं।  मगर, व्यापक जनहित में कभी-कभी उचित रोक लगाने की जरूरत होती है। मीडिया ट्रायल नहीं होनी चाहिए। आरोपियों को अग्रिम रूप से मीडिया रिपोर्ट से लाभ नहीं पहुंचना चाहिए।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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