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राजनीति में राज करने के लिए कौन, कब, कौन सी नीति अपना ले पता नहीं चलता। कुछ ऐसा ही हाल बिहार की राजनीति में देखने को मिल रहा है। महागठबंधन की जिस गांठ को नीतीश ने लालू के साथ मिलकर बांधा था, उन्होंने उसे सुशील मोदी के साथ मिलकर सुलझा लिया। आज बिहार विधानसभा में राजद नेताओं के विरोध के बीच नीतीश कुमार ने बहुमत साबित करते हुए जेडीयू-बीजेपी की सरकार बना ली। जहां नीतीश-मोदी के पाले में 131 वोट आए वहीं विपक्ष के पाले में 108 वोट आए।  नीतीश के विश्वास मत हासिल करते ही राजद ने सदन से वॉकआउट किया और सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई।

सुबह 11 बजे पेश होने वाला यह प्रस्ताव राजद के हंगामे के चलते 12 बजे के बाद पेश हो सका। प्रस्ताव पेश होने से पहले राजद नेता तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर जमकर हमला बोला। तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार ने उनसे एक बार भी इस्तीफा नहीं मांगा था और ना ही उन्हें बर्खास्त किया। नीतीश पर तंज कसते हुए तेजस्वी बोले कि ‘नीतीश तो ‘हे राम’ से ‘जय श्री राम’ पर पहुंच गए हैं।’

उन्होंने अपने भाषण में कहा कि नीतीश कुमार बीजेपी से डर गए और उसके सामने घुटने टेक दिए जबकि मैं 28 साल का हो कर भी नहीं डरा। सरकार पांच साल की चुनी गई थी फिर ये पांच साल तक क्यों नहीं चली? तेजस्वी यादव ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रीप्लान बताया। साथ ही नीतीश पर संगीन जुर्म करने का आरोप भी लगाया।

वहीं नीतीश ने भी आरजेडी पर तीखे बोल बोले। उन्होंने कहा कि आरजेडी हमें साम्प्रदायिकता का पाठ न पढ़ाए, सेक्युलरिज्म का प्रयोग भ्रष्टाचार को जस्टिफाई करने के लिए नहीं होना चाहिए। नीतीश कुमार ने विश्वासमत पर बोलते हुए कहा कि सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए। हम एक-एक बात का सबको जवाब देंगे। सत्ता सेवा के लिए होता है, मेवा के लिए नहीं।

वहीं उपमुख्यमंत्री सुशील मोदी ने चुटकी लेते हुए आरजेडी और कांग्रेस पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि मैं कांग्रेस और आरजेडी का धन्यवाद देना चाहूंगा, अगर तेजस्वी ने रिजाइन कर दिया होता तो मैं यहां न होता।

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