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उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूह से जुड़कर अगरबत्ती, पापड़, अचार, मिट्टी के बर्तन, माला, दोना पत्तल, सोलर लैंप, चरखा, जरदोजी, बनारसी साड़ी आदि बना रही महिलाओं के हुनर की ब्रांडिंग करेगी। इनके उत्पादों को बाजार मिल सके इसके लिए इन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा और ब्रांडिंग का काम भी किया जाएगा।

आजीविका मिशन के तहत ग्राम्य विकास विभाग ने स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण क्षेत्रों की 22 लाख महिलाओं को मार्केटिंग के लिए ट्रेनिंग देने की तैयारी की है। इसके लिए कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी। इस संबंध में 19 सितंबर को प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास अनुराग श्रीवास्तव वीडियो कॉंफ्रेंसिंग कर राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के कार्यों की समीक्षा करेंगे। वीडियो कांफ्रेंसिंग में महिला स्वयं सहायता समूहों की ओर से बनाए जा रहे सामानों की ब्रांडिंग और मार्केटिंग पर चर्चा होगी।

ग्राम्य विकास आयुक्त एनपी सिंह के की मानें तो स्वयं सहायता समूह को आंदोलन बनाया जाएगा। इनके उत्पादों की ब्रांडिंग से महिला सेलिब्रिटी और अभिनेत्रियों को जोड़ा जाएगा। समूह की महिलाओं को श्रम, पूंजी और बाजार पर नियंत्रण के गुर सिखाए जाएंगे। परिवार में महिलाओं की भूमिका मजबूत होगी।  

उन्होंने कहा कि समूह से जुड़ी महिलाएं बड़े-बड़े कार्य कर रही है, लेकिन इन्हें कोई जान नहीं पाता है। स्कूलों में स्वेटर वितरण के सरकार के महिम में इन महिलाओं ने करीब 40 करोड़ रुपये मूल्य के स्वेटर की सप्लाई स्कूलों को दी। इस रक्षाबंधन पर इनके हाथों से बनीं करोड़ों रुपये की राखियां बिकीं। ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में भी बड़ा काम कर रही हैं। आईआईटी मुंबई और केंद्र सरकार के सहयोग से 19 जिलों में समूह की महिलाएं सोलर लैंप बना रही हैं। करीब चार लाख सोलर लैंप बेच चुकी हैं। प्रति लैंप की कीमत 100 रुपये है।

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