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देश में उदारीकरण, पंचायती राज और संचार क्रांति के जनक पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज पुण्यतिथि है और पूरा देश आज उनको याद कर रहा है। पूरे देश में उनके स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। सुबह करीब सात बजे राजीव गांधी के समाधि स्थल वीरभूमिपहुंचकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और रॉबर्ट वाड्रा ने पूर्व प्रधानमंत्री को श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भी राजीव गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की। गौरतलब है कि भारत के छठे प्रधानमंत्री राजीव गांधी की चुनाव प्रचार के दौरान तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में 21 मई 1991 को  46 साल की उम्र में हत्या कर दी गयी थी।

Rajiv gandhiप्रधानमंत्री के रूप में राजीव गांधी अपनी माता इंदिरा गांधी से अधिक व्यावहारिक और उदार थे। इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में सिख विरोधी दंगों ने माहौल को और भी अधिक विषाक्त कर दिया था। एक नए प्रधानमंत्री के लिए ऐसी स्थिति को संभालना काफी मुश्किल और जटिल था।  ऊपर से राजीव गांधी पर प्रधानमंत्री पद को ना ग्रहण करने का पारिवारिक दबाव था। इसका जिक्र इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी एलेक्ज़ेंडर ने अपनी किताब ‘माई डेज़ विद इंदिरा गांधी’ में भी किया है। उन्होंने लिखा है कि  इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटों के बाद उन्होंने सोनिया और राजीव को लड़ते हुए पाया था। राजीव सोनिया को बता रहे थे कि पार्टी चाहती है कि, ‘मैं प्रधानमंत्री पद की शपथ लूँ।’ सोनिया ने कहा ‘हरगिज़ नहीं, वो तुम्हें भी मार डालेंगे’ और राजीव का जवाब था, ‘मेरे पास कोई विकल्प नहीं है, मैं वैसे भी मारा जाऊँगा।’ सात वर्ष बाद राजीव के ये बोल बिल्कुल सही साबित हुए।

आखिरी क्षण

21 मई की शाम राजीव गांधी को एक चुनावी सभा के लिए विशाखापत्तनम से चेन्नई जाना था, जहां से 40 किलोमीटर दूर श्रीपेरंबदूर में उनकी सभा थी। जब वह एयरपोर्ट पहुंचे तो उनके विशेष विमान में कुछ तकनीकी खराबी आ गई। जिसके कारण वह फिर से होटल वापिस लौट आए। फिर एयरपोर्ट से खबर आई कि तकनीकी खराबी को दूर कर लिया गया है और वे फिर से एयरपोर्ट की ओर रवाना हो गए। वह अपनी आखिरी विमान यात्रा के खुद पायलट थे क्योंकि राजीव खुद विमान चला रहे थे। पुरुष समर्थकों से मिलने के बाद राजीव ने महिलाओं की तरफ़ रूख़ किया। तभी तीस साल की एक छोटी कद और गहरे रंग की लड़की चंदन का एक हार ले कर राजीव गाँधी की तरफ बढ़ी। जैसे ही वह उनके पैर छूने के लिए झुकी, कानों को बहरा कर देने वाला धमाका हुआ और राजीव गांधी के शरीर के लोथड़े जगह जगह उड़ गए। इस आत्मघाती धमाके में राजीव के साथ 14 अन्य लोग भी मारे गए थे।

खबर सुनने के बाद आया था सोनिया को अस्थमा का दौरा

रशीद किदवई सोनिया की जीवनी में लिखते हैं कि जब राजीव गांधी के निजी सचिव विंसेंट जॉर्ज ने अपनी कांपती हुई आवाज़ में कहा “मैडम मद्रास में एक बम हमला हुआ है।” तो सोनिया ने उनसे तुरंत पूछा, “इज़ ही अलाइव?” पर जॉर्ज चुप रहें और उनकी चुप्पी ने सोनिया को सब कुछ बता दिया था। इसके बाद सोनिया पर बदहवासी का दौरा पड़ा और 10 जनपथ की दीवारों ने पहली बार सोनिया को चीख कर विलाप करते सुना। उसके बाद सोनिया को अस्थमा का ज़बरदस्त अटैक पड़ा और वो करीब-करीब बेहोश हो गईं।  प्रियंका गांधी उनकी दवा ढ़ूँढ़ रही थीं लेकिन वो उन्हें नहीं मिली।  वह सोनिया को दिलासा देने की कोशिश भी कर रही थीं लेकिन सोनिया पर उसका कोई असर नहीं पड़ रहा था।

 

प्रधानमंत्री के रुप में राजीव गांधी की कुछ विशेष उपलब्धियां

प्रधानमंत्री पद ग्रहण करने के बाद राजीव गांधी ने पंजाब समस्या को प्राथमिकता देते हुए 24 जुलाई, 1985 को अकाली दल के अध्यक्ष संत हरचंद सिंह लोंगोवाल के साथ एक अहम समझौता किया। उन्होंने आर्थिक नीतियों को जवाहरलाल नेहरू के समाजवादी नीतियों के प्रभाव से मुक्त करते हुए आर्थिक उदारीकरण का रास्ता खोला था। सोवियत रूस की तरफ अधिक झुके हुए भारत को उन्होंने अमेरिका की तरफ मोड़ा और अमेरिका से आर्थिक और वैज्ञानिक-तकनीकी सहयोग की दिशा में कदम बढ़ाया।

लालफीताशाही पर लगाम लगाकर उन्होंने निजी क्षेत्र को औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियों के विस्तार की अनुमति दी। 1990 के दशक में आर्थिक उदारवाद और मुक्त व्यापार का श्रेय भी उन्हें ही जाता है। उच्च शिक्षा के लिए ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ और ग्रामीण भारत में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के लिए जवाहर नवोदय विद्यालयों की स्थापना का कार्य करवाया। देश में सूचना क्रांति का सूत्रपात किया और संचार-व्यवस्था गांवों तक पहुंचनी शुरू हुई।

वर्ष 1985 में ‘पंचायती राज अधिनियम’ के द्वारा राजीव गांधी सरकार ने सत्ता का विकेंद्रीकरण करते हुए ग्रामीण प्रशासन में आम लोगों की भागीदारी को सुनिश्चित कराया और पंचायतों को महत्वपूर्ण वित्तीय और राजनीतिक अधिकार भी दिए।

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