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लखनऊ के विवेक तिवारी गोलीकांड में जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए खुलासों की लिस्ट लंबी होती जा रही है। एसआईटी की जांच में बृहस्पतिवार को अब इस बात का खुलासा हुआ है कि आरोपी सिपाही प्रशांत चौधरी को पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग नहीं मिली थी। उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से उसे पिस्टल चलाने की ट्रेनिंग नहीं दी गई थी।

विवेक तिवारी हत्याकांड में कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी के चलते यूपी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए। विवेक तिवारी पर गोली चलाने वाले सिपाही प्रशांत चौधरी और संदीप कुमार की करतूत ने पूरे पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया है। जिसके बाद आखिरकार विभाग ने ट्रेनिंग देने का फैसला लिया। अब पुलिस विभाग ने सिपाहियों के व्यवहार, सुरक्षा, अपराध नियंत्रण और असलहों के इस्तेमाल को लेकर फिर से ट्रेनिंग देने का फैसला लिया है। इस ट्रेनिंग में सिपाहियों को अनुशासन, जनता से व्यवहार करने का तरीका और मानवीय पहलुओं से जुड़ी हुई नसीहतें दी जाएंगी। साथ ही साथ इस जानकारी और ट्रेनिंग को रोजमर्रा की कार्यशैली में शामिल करने का तरीका भी सिखाया जाएगा।

बताया जा रहा है कि सोमवार से ये ट्रेनिंग एडीजी जोन के नेतृत्व में शुरू कर दी जाएगी। सबसे पहले लखनऊ के करीब 6000 सिपाहियों को 300-300 के ग्रुप में ट्रेनिंग दी जाएगी। 300-300 सिपाहियों के बैच को दो-दो सप्ताह की ट्रेनिंग करवाई जाएगी। करीब एक साल तक यह ट्रेनिंग प्रोग्राम चलेगा। इस ट्रेनिंग में रविवार को छुट्टी रखी जाएगी। ट्रेनिंग हर रोज सुबह 6.30 बजे से शाम 6.30 बजे तक दी जाएगी। जिन बातों पर खासतौर पर ध्यान दिया जाएगा वो है कि पुलिसवाले अपने संपर्क में आने वाले नागरिकों के साथ कैसे संवाद करें। कैसे पुलिसवाले किसी भी मामले की जांच करते वक्त किसी भी तरीके की उग्रता या अशोभनीय व्यवहार न करें। इसके अलावा अगर इलाके में कोई भी वीआईपी मूवमेंट होता है तो ऐसे में पुलिसवालों का व्यवहार किस तरीके से होना चाहिए। इसकी भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इस ट्रेनिंग के दौरान पूर्व पुलिस अधिकारी, आम जनता, मीडिया, विज्ञान, शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग भी शामिल होंगे।

एपीएन ब्यूरो

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