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केंद्र की मोदी सरकार के लिए 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान 15 लाख का चुनावी वादा अब गले की फांस बन चुका है। जहां एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी के इस वादे को मुद्दा बनाकर अक्सर विपक्ष मोदी सरकार पर हमलावर होता रहता है। वहीं इस मामले पर मोहन कुमार शर्मा ने एक आरटीआई डालकर पूछा कि उनके खाते में 15 लाख रुपये कब आएंगे। इस पर जवाब देते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने केंद्रीय सूचना आयोग से कहा कि आरटीआई एक्ट के तहत इसकी जानकारी नहीं दी जा सकती।

बता दें कि मोहन कुमार ने 26 नवंबर 2016 को एक याचिका डाली थी, जिसमें उन्होंने लोगों के खाते में 15 लाख रुपए जमा होने की तारीख पूछी थी। सूचना के अधिकार के तहत प्रधानमंत्री कार्यालय से ऐसा सवाल पूछा गया जिसका जवाब देने से मना कर दिया गया। आरटीआई के जरिए पूछा गया कि प्रधानमंत्री मोदी ने जो 15 लाख रूपये देने का वादा किया था उसकी तारीख क्या है? इस सवाल के जवाब में प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) को जानकारी देते हुए बताया कि आरटीआई एक्ट के तहत ऐसी कोई सूचना नहीं है, इसलिए इससे संबंधित जानकारी या जवाब नहीं दिया जा सकता।

सीआईसी आरके माथुर ने बताया, ‘पीएमओ की ओर से आवेदककर्ता को यह जानकारी दी गई कि उनकी ओर से आरटीआई के जरिए मांगी गई जानकारी आरटीआई एक्ट के सेक्शन 2(एफ) के अंतर्गत सूचना की परिभाषा के दायरे में नहीं आती। इसलिए इसका जवाब नहीं दिया जा सकता।

आरटीआई कानून की इस धारा के अनुसार सूचना से तात्पर्य रिकार्ड, दस्तावेज,ज्ञापन ,ई – मेल, प्रेस विज्ञप्ति सलाह,अनुबंध, रिपोर्ट, दस्तावेज, नमूना समेत किसी भी रूप में रखी सामग्री से है। साथ ही सूचना किसी भी निजी निकाय से संबद्ध हो सकती है जिस तक किसी भी कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकार की पहुंच हो सकती है।

बता दें कि 2014 में लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने कहा था कि विदेश से जब काला धन वापस स्वदेश आएगा तो हर भारतीय के खाते में 15 लाख रुपये आ जाएंगे।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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