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राफेल विमान सौदे को लेकर कांग्रेस के निशाने पर रहे रिलायंस समूह के अध्यक्ष अनिल अंबानी ने सौदे से संबंधित सभी जनहित याचिकाओं को उच्चतम न्यायालय द्वारा आज खारिज कर दिये जाने पर शुक्रवार को कहा कि इससे पता चलता है कि उन पर लगाये गये सभी आरोप बेबुनियाद, तथ्यहीन, राजनीति से प्रेरित थे।

अंबानी ने उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि राफेल सौदे से संबंधित सभी जनहित याचिकाओं को खारिज किये जाने से पता चलता है कि रिलायंस समूह और उन पर लगाये गये आरोप गलत थे। रिलायंस समूह देश की राष्ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के प्रति प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, “ हमारी प्रतिबद्धता राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति बनी हुई है और हम रक्षा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘कौशल भारत’ जैसी नीतियों में अपना योगदान जारी रखेंगे।”

उल्लेखनीय है कि उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सौदे की प्रक्रिया की वैधता को चुनौती देने वाली सभी छह याचिकाएं यह कहते हुए खारिज कर दी कि उसे सौदे में कोई अनियमितता नजर नहीं आई। शीर्ष अदालत ने राफेल लड़ाकू विमान को देश की जरूरत बताते हुए याचिकाएं ठुकराईं।

न्यायमूर्ति गोगोई ने फैसला सुनते हुए कहा सितंबर 2016 में जब राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया गया था, उस वक्त किसी ने खरीद प्रक्रिया पर सवाल नहीं उठाये थे। उन्होंने कहा, “हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।” न्यायालय ने कहा के राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है।

शीर्ष अदालत ने माना कि भारतीय वायुसेना में राफेल की तरह के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है। पीठ ने कहा, “देश को चौथी एवं पांचवी पीढ़ी लड़ाकू विमानों की जरूरत है, जो हमारे पास नहीं है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता।”

न्यायालय ने कहा कि उसे राफेल खरीद सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नजर नहीं आता। संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के शासन काल में 126 लड़ाकू विमान खरीदे जाने के बजाय मोदी सरकार द्वारा केवल 36 लड़ाकू विमान खरीदे जाने को लेकर उठाये गये सवालों पर न्यायालय ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।

विमान की कीमतों के मुद्दे पर न्यायालय ने कहा कि राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है। खंडपीठ ने कहा, “हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।”

 

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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