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झारखंड की रघुवर सरकार अभी 50 हजार करोड़ से अधिक के कर्ज में दबी हुई है लेकिन इसके बावजूद रघुवर सरकार टाटा पर मेहरबान है। टाटा अपने लीज से संबंधित 17 सौ करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान नहीं कर रहा है जबकि सरकार चुप्पी साधे बैठी हुई है।

50 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज विभिन्न संस्थानों से और एजेंसियों से रघुवर सरकार ने लिया है। जबकि कैग की रिपोर्ट इसके लिए विभाग को जिम्मेदार ठहराती है। सीएजी का कहना है कि 2008 से 2017 के विभागों की लापरवाही के कारण 12985 करोड़ रुपये के राजस्व की वसूली नहीं हुई है। इसके साथ ही देश की बड़ी कंपनियों में से एक टाटा स्टील ने झारखंड सरकार के साथ पट्टे के आवंटन से संबंधित 1785 करोड़ का बकाया है, जिसका भुगतान अब तक नहीं हुआ।

झारखंड सरकार की कैग रिपोर्ट में आमदनी से अधिक खर्च होने की बात कही गई है और टाटा कंपनी को भी झारखंड सरकार का सबसे बड़ा बकायेदार बताया गया है।

टाटा कंपनी पर झारखंड सरकार यूं ही मेहरबान नहीं हुई है बल्कि टाटा कंपनी झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा और खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय पर भी अपना प्रभाव रखती है। 2005 में अर्जुन मुंडा के मुख्यमंत्रित्व काल में टाटा लीज का नवीनीकरण हुआ था इन तीनों राजनेताओं पर समय-समय पर टाटा कंपनी की मेहरबानी भी दिखती रही है और कारण है कि झारखंड सरकार के अधिकारी टाटा से बकाया वसूली के लिए किसी प्रकार की कार्यवाही करने से बचते रहे हैं। झारखंड सरकार के मंत्री भी टाटा को लेकर कारवाई करने से आनाकानी करते देखे जाते हैं।

टाटा कंपनी भले ही देश में बड़ी कंपनी का दर्जा पाई हो लेकिन फिलहाल वो झारखंड सरकार का बकायेदार है और गलत ढंग से जमीन की लीज ली हुई है।

                                                                                                                      एपीएन ब्यूरो

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