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चारा घोटाले के आरोप में रांची के होटवार जेल में बंद आरजेडी प्रमुख लालू यादव को जेल में कोई वीवीआईपी ट्रीटमेंट नहीं मिलने वाला है। फिलहाल झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास के संकेतों से यही लग रहा है। झारखंड सरकार के तीन साल पूरा होने पर प्रेस के सामने रिपोर्ट कार्ड पेश करते हुए रघुबर दास ने कहा कि सरकार अपने जेल मैन्यूअल के खिलाफ जाकर लालू यादव को कोई राहत नहीं देने वाली है।

पत्रकारों द्वारा ये पूछे जाने पर कि हेमंत सोरेन सरकार में जेल में लालू से मिलने-जुलने वालों पर कोई पाबंदी नहीं थी। इस पर रघुबर दास ने कहा कि मैंने पहले भी कहा है कि कानून से बड़ा कोई नहीं है और सभी लोग कानून के दायरे में हैं। कानून के दायरे में रहकर ही कोई काम किया जाएगा, चाहे व्यक्ति कोई भी क्यों न हो। जेल मैन्यूअल के अनुसार कानून अपना काम कर रहा है। इस तरह रघुबर दास ने रांची में डेरा जमाए राजद नेताओं को नियम विरुद्ध जाकर किसी भी तरह की सहायता देने से इनकार कर दिया।

रघुबर दास के इस बयान से निश्चित रूप से राजद के नेताओं और समर्थकों को काफी निराशा हुई है। अब वे फिलहाल कोर्ट खुलने का इंतजार कर रहे हैं। उन्हें उम्मीद हैं कि शायद कोर्ट में इस मुद्दे पर अपील करने से कुछ नरमी बरती जाए। हालांकि सूत्रों के हवाले से खबर ये है कि लालू को जेल के अंदर कोई समस्या नहीं हो रही है। वह जिस तरह की सब्जी और खाने के सामान की इच्छा प्रकट कर रहे हैं, वो सब पूरी की जा रही हैं। गौरतलब है कि लालू एक देसी आदमी हैं और देसी खान मसलन साग रोटी दाल खाना पसंद करते हैं।

राजद नेता रांची में रहकर लालू को यही सब चीजें मुहैय्या कराना चाहते हैं। पार्टी के नेता और रांची में उपस्थित भोला यादव से ने राज्य सरकार पर लालू के साथ बुरा बर्ताव करने का आरोप लगाया। भोला ने कहा, उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। जब से लालू जी जेल गये हैं तब से हमलोग सिर्फ एक बार ही उनसे मिल पाए हैं।

भोला ने कहा कि जेल मैन्युअल में यह नियम है कि कैदी के रिश्तेदार और दोस्त उनसे मिल सकते हैं और इसमें संख्या का भी जिक्र नहीं है। नियम 619 के अनुसार यह जेलर के विवेक पर निर्भर करता है। तो अगर मुख्यमंत्री रघुवर दास मैन्यूअल की बात करते हैं तो मैन्युअल के अनुसार भी हमें उनसे मिलने देना चाहिए। रघुवर दास कह रहे थे कि लालू के साथ आम कैदी की तरह ही व्यवहार किया जाएगा और हम भी यही चाहते हैं उन्हें एक आम कैदी के अधिकार मिले, जो उन्हें मिलने चाहिए।

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