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राजस्थान के मुख्यमंत्री जौहर प्रथा को लेकर दिए विवादित बयान से एक बार फिर सुर्खियों में आ गए है। अशोक गहलोत ने बीते शनिवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि पुराने समय की जौहर प्रथा गौरव का विषय है। ‘जौहर इतिहास में हमारे गौरव और बलिदान का विषय रहा है।’ इतना ही नहीं अशोक गहलोत ने महाराणा प्रताप को बलिदान और साहस का प्रतीक बताते हुए बीजेपी पर ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ करने का आरोप भी लगाया।

आपको बता दें कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की यह टिप्पणी राजस्थान में कांग्रेस सरकार के आने के बाद स्कूलों के पाठ्यक्रम में बदलाव पर उठे विवाद को लेकर आई है। उल्लेखनीय है कि आठवीं कक्षा राज्य में आठवीं कक्षा की अंग्रेजी की पुस्तक में जौहर की एक प्रतीकात्मक तस्वीर को हटाकर उसकी जगह एक किले की तस्वीर लगायी गयी है।

इसके साथ ही दसवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम में विनायक दामोदर सावरकर के नाम के आगे से वीर संबोधन हटाया गया है। भाजपा ने सावरकर के नाम के आगे से वीर संबोधन हटाये जाने समेत कुछ बदलावों का विरोध किया है। कांग्रेस के भी कुछ नेताओं ने इन बदलावों का विरोध किया है। इनमें राजस्थान के ट्रांसपोर्ट मंत्री प्रताप सिंह और राज्य कांग्रेस के वाइस प्रेसिडेंट गोपाल सिंह इदवा का नाम शामिल है।

मालूम हो कि राजस्थान में कांग्रेस सरकार ने माध्यमिक शिक्षा के सिलेबस की किताबों में बदलाव कर दिया है। नई किताबों में सावरकर के चैप्टर में बदलाव करते हुए उन्हें वीर और क्रांतिकारी के स्थान पर अंग्रेजों से दया मांगने वाला बताया गया है।

वहीं, खबर यह भी है कि राजस्थान की कांग्रेस सरकार स्कूली बच्चों के पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को लेकर भी कुछ बदलाव करने जा रही है।

बता दें कि पिछली बीजेपी सरकार ने पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी के युद्ध का विजेता बताया था। अब कांग्रेस सरकार अब इसमें संशोधन करने जा रही है। नए पाठ्यक्रम में महाराणा प्रताप को हल्दीघाटी का विजेता नहीं बताया गया है।

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