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पाकिस्तान की आतंकी रणनीति को नाकामयाब करने के लिए भारत ने एक नया हथियार तैयार किया है। इस नए हथियार से भारतीय जवानों को पता चल जाएगा कि पाकिस्तानी घुसपैठिए कब, कहां और कैसे सीमा को पार कर रहे हैं। ऐसे में उनके खात्मे का इंतजाम भारतीय सेना पहले से कर के रखेगी। जम्मू में अंतरराष्ट्रीय सीमा के दो हिस्सों में अपनी तरह का यह पहला हाई-टेक सर्विलांस सिस्टम तैयार किया गया है। खबरों के मुताबिक, इसी महीने की 17 तारीख को केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इस परियोजना का औपचारिक उद्घाटन करेंगे। राज्य के कठुआ जिले में लगाई गई करीब 10 किलोमीटर लंबाई वाली यह बाड़ किस तरह अपना काम करेगी, इस मौके पर इसे लेकर एक प्रस्तुति भी दी जाएगी।

इसकी मदद से जमीन, पानी और हवा में एक अदृश्य इलेक्ट्रॉनिक बैरियर होगा, जिससे सीमा सुरक्षा बल (BSF) को घुसपैठियों को पहचानने और मुश्किल इलाकों में घुसपैठ रोकने में मदद मिलेगी। सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के महानिदेशक केके शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि इन अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को 2,400 किमी लंबी पाकिस्तान और बांग्लादेश से लगी भारतीय सीमा पर लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भारत के रिश्ते बांग्लादेश और उसकी सीमा सुरक्षा बल बीजीबी के साथ फिलहाल बेहद दोस्ताना हैं।

बता दें कि अब CIBMS के तहत कई आधुनिक सर्विलांस टेक्नॉलजी का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें थर्मल इमेजर, इन्फ्रा-रेड और लेजर बेस्ड इंट्रूडर अलार्म की सुविधा होगी, जिसकी मदद से एक अदृश्य जमीनी बाड़, हवाई निगरानी के लिए एयरशिप, नायाब ग्राउंड सेंसर लगा होगा जो घुसपैठियों की किसी भी हरकत को भांप कर सुरक्षा बलों को सूचित कर देगा।  अब तक घुसपैठिए सुरंग खोद कर भी भारत की सीमा में घुस आते थे, पर अब ऐसा मुमकिन नहीं होगा। सुरंग, रेडार और सोनार सिस्टम्स के जरिए बॉर्डर पर नदी की सीमाओं को सुरक्षित किया जा सकेगा।

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