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राम मंदिर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के इंटरव्यू के बाद विश्व हिन्दू परिषद के कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने बुधवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रुख से असहमती जताई है। उन्होनें कहा राम मंदिर निर्माण में आगे उठाए जाने वाले कदम का फैसला 31 जनवरी और एक फरवरी को प्रयागराज में कुंभ के मौके पर आयोजित धर्मसंसद में लिया जाएगा।

उसी में यह तय होगा कि इस मांग को पूरा कराने के लिए और कौन से कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मंदिर मामला लंबे समय से कोर्ट में लटका है। यह मामला 69 वर्ष से फंसा है। सुप्रीम कोर्ट में अभी तक जजों की बेंच भी नहीं बनी है। उन्होंने कहा कि हम मंदिर निर्माण के लिए कोर्ट के आदेश का इंतजार नहीं कर सकते। उचित यह होगा कि संसद द्वारा कानून बनाकर भगवान की जन्मभूमि पर भव्य मंदिर का मार्ग अभी प्रशस्त किया जाए।

यह पूछे जाने पर कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले और संविधान के हिसाब से मंदिर निर्माण की बात की है, इस पर वीएचपी का क्या कहना है। इसके जवाब में उन्होंने असहमति जताते हुए कहा कि हम अपना प्रयास जारी रखेंगे ताकि पीएम मोदी समेत सत्ता में बैठे लोगों का मन बदल सकें। हम कोर्ट के फैसले का इंतजार नहीं कर सकते। साथ ही हम मंदिर निर्माण के लिए संसद में कानून लाया जाए इसके लिए हम सरकार से आग्रह करते रहेंगे।

एससी एसटी एक्ट में सरकार द्वारा किए बदलाव का हवाला देते हुए आलोक कुमार कहा कि सरकार के पास अधिकार है कि वो मंदिर निर्माण के लिए कानून बना सके। अधिकांश सांसदों ने मंदिर निर्माण के लिए संसद द्वारा कानून बनाए जाने का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी का मंदिर निर्माण को लेकर प्रतिबद्धता हमें अच्छा लगा, लेकिन अध्यादेश को लेकर उनकी टाइमिंग है, हम उनको राय देंगे कि उसे बदलें और अध्यादेश अभी लेकर आएं।

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