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केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) की विशेष अदालत ने लगभग 16 साल पुराने सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह और तीन अन्यों को दोषी करार दिया है।  विशेष जज जगदीप सिंह ने उक्त मामले में आज अपराहन फैसला सुनाते हुये डेरा प्रमुख के अलावा तीन अन्यों कृष्णलाल, कुलदीप और निर्मल को भी दोषी ठहराया है। अदालत अब चारों को 17 जनवरी को सज़ा सुनाएगी।

गुरमीत राम रहीम सिंह को रोहतक की सुनारिया जेल से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुये जहां वह साध्वी यौन शोषण मामले में उम्र कैद की सज़ा काट रहे हैं और यह सज़ा भी विशेष जज जगदीप सिंह ने ही सुनाई थी। इस मामले में तीन अन्य आरोपियों को पुलिस ने यहां व्यक्तिगत तौर पर कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत में पेश  किया गया। दोषी करार दिये जाने के बाद तीनों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया तथा इन्हें अम्बाला जेल ले जाया गया है।

अदालल के आज उक्त मामले में फैसला सुनाने के मद्देनज़र पंचकूला और सिरसा में सुरक्षा व्यवस्था के चाक चौबंद इंतज़ाम किये गये थे। सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले कड़वे अनुभवों से सबक लेते हुये समूचे पंचकूला क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया था। चप्पे चप्पे पर पुलिस तैनात की गई थी। विशेषकर अदालत परिसर और इसके आसपास पूरी किलेबंदी की गई थी। शहर के सभी प्रवेश मार्गों पर कल से नाके लगाये गये थे। चंडीगढ़ में भी जगह जगह नाकों के अलावा पुलिस का कड़ा पहरा था। यहां तक कि विशेष जज को भी कड़ी सुरक्षा के बीच अदालत लाया गया। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान डेरा प्रमुख के ड्राईवर खट्टा सिंह की गवाही चारों को दोषी साबित करने में अहम रही। इसके अलावा यह भी साबित हुआ कि जिस रिवॉल्वर से छत्रपति की हत्या की गई थी वह किशनलाल की लाईसेंसी रिवॉल्वर थी।

छत्रपति को 24 अक्तूबर 2002 को गोली मारी गई थी जिसमें वह गम्भीर रूप से घायल हो गये थे। बाद में उन्होंने 21 नवम्बर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में ईलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। छत्रपति सिरसा से सिरसा से सांध्यकालीन अखबार ‘पूरा सच्च‘ निकालते थे। छत्रपति ने ही साध्वियों द्वारा डेरा में उनके साथ यौन शोषण होने को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को लिखा गया पत्र प्रकाशित किया था। इसके बाद ही छत्रपति को जान से मारने की धमकियां मिल रहीं थीं।

छत्रपति की हत्या के बाद उनके परिवार ने पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय से इस मामले की सीबीआई से जांच कराने की मांग की थी। अदालत ने बाद में इस मामले को जांच के लिये सीबीआई को सौंप दिया था। जांच के दौरान सीबीआई कड़ियों को जोड़ते हुये आरोपियों तक जा पहुंची। इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लगभग 46 और बचाव पक्ष की ओर से 21 गवाहियां हुईं। पिता की हत्या के चश्मदीद गवाह अंशुल और आदिरमन छत्रपति समेत परिवार के सभी सदस्यों ने अदालत के फैसले के बाद अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उन्होंने ताकतवर दुश्मन के खिलाफ लड़ाई लड़ी है और उम्मीद है कि लगभग 16 साल का संताप झेलने के बाद उन्हें अब न्याय मिलेगा।

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