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देश की अर्थव्यवस्था की हालत वैसे भी अच्छी नहीं चल रही है। ऊपर से बैंकों में बढ़ता जा रहा एनपीए चिंता का विषय बनता जा रहा है। सरकार पूरी कोशिश कर रही है, व्यवस्थाओं को संभालने में लेकिन सरकार का कोई भी कदम सकारात्मक असर नहीं दिखा पा रहा है। अभी हाल ही में देश में दो बड़े घोटाले सामने आए हैं जिससे पूरा देश हिल गया है। सत्तापक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। ऐसे में आरबीआई की यह रिपोर्ट बड़ी चिंताजनक है। आरबीआई ने अपनी रिपोर्ट में खुद खुलासा किया है कि बैंक के कर्मचारी घोटाले में लिप्त होते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि हर चार घंटे में बैंक का एक कर्मचारी धोखाधड़ी जैसे मामलों में पकड़ा जाता है। रिजर्व बैंक के तैयार किए एक डाटा के मुताबिक, देश में हर चार घंटे में एक बैंकर को फ्रॉड के केस में पकड़ा जाता है और उसे सजा दी जाती है।

आरबीआई के आंकड़ें बताते हैं कि 1 जनवरी 2015  से 31 मार्च 2017 के बीच सार्वजनिक क्षेत्रों के बैंकों के 5200  कर्मचारियों को धोखाधड़ी के मामलों में सजा हुई है। आरबीआई के दस्तावेज़ कहते हैं कि धोखाधड़ी करने वाले कर्मचारियों को सजा के तौर पर जुर्माने के साथ नौकरी से बर्खास्त किया गया है। रिजर्व बैंक इस समय अप्रैल 2017 से लेकर अभी तक के मामलों का डेटा तैयार कर रहा है। पब्लिक सेक्टर बैंकों में सबसे ज्यादा फ्रॉड के मामलों में एसबीआई के कर्मचारी टॉप पर रहे। एसबीआई के 1,538 कर्मचारियों पर धोखाधड़ी के मामलों पर ऐक्शन हुआ। इसके बाद इंडियन ओवरसीज बैंक और फिर सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने सबसे ज्यादा फ्रॉड किया। पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में इस दौरान 184 और यूनियन बैंक ऑफ़ इंडिया के 214 कर्मचारी धोखाधड़ी के मामलों में लिप्त रहे हैं।

बैंक अभी अप्रैल 2017 से दिसंबर तक का डाटा तैयार कर रहा है।  फ्रॉड के कुल मामलों में बैंक कर्मचारी के मिले होने वाले मामलों की संख्या 2084 है। 17,504 घोटालों में 2084 मामले बैंक कर्मचारियों द्वारा किए गए धोखाधड़ी के मामले हैं, जो कुल मामलों का 12 प्रतिशत है। आंकड़ों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कर्मचारियों द्वारा धोखाधड़ी में कितने पैसे का घोटाला हुआ था।

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