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शाहजहांपुर के खुदागंज ब्लॉक के गांव नवादा दरोबस्त गांव को अमर शहीद रोशन सिंह के पैतृक गांव के तौर पर जाना जाता है… रोशन सिंह ने देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति दिलाने के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया था… शाहजहांपुर के सांसद कृष्णा राज ने जब अप्रैल 2016 में इस गांव को सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया तो लोगों को लगा कि अब इस गांव को उसका हक मिलेगा… वो इज्जत मिलेगी जिसका शहीद रोशन सिंह का ये गांव हकदार है… क्या सचमुच सांसद कृष्णाराज ने नवादा दरोबस्त को गोद लेकर उसे आदर्श गांव बनाया है इसका जायजा लेने के लिए हम नवादा दरोबस्त गांव पहुंचे…

गांव में प्रवेश करने पर शहीद रोशन सिंह ने नाम पर शानदार प्रवेश द्वारा बनाया गया है और यहां पर अभी सड़क बनाई जा रही था… सड़क पर गिट्टी बिछाई गई थी… सांसद द्वारा गोद लिए दो साल बीत जाने के बाद गांव की मुख्य सड़क को बनाए जाते देख हमारा माथा ठनका… जब दो साल बाद मुख्य सड़क बन रहा है तो गांव की बाकी सड़को का क्या हाल होगा… गांव में विकास की पड़ताल करने से पहले से पहले हमने शहीद रोशन सिंह के स्मारक स्थल का जायजा लेने का फैसला किया… शहीद रोशन सिंह के स्मारक में उनकी मूर्ति स्थापित की गई है जो ठीक-ठाक हालत में नजर आई… स्मारक के पास ही हमारी मुलाकात शहीद रोशन सिंह के भतीजे से साथ हो गई… जब हमने उनसे गांव में विकास की बात की तो गांव की दुर्दशा बताते उनकी आंखों से आंसू छलक आए

आरोप है कि सांसद ने ना तो गांव का विकास किया और ना ही शहीद रोशन के परिवार वालों को उनका उचित हक दिलाया…शहीद रोशन सिंह के रिश्तेदारों से बात करने के बाद हम के कुछ और लोगों से बात की…तो लोगों को आरोप था कि गांव को गोद लेने वाली सांसद कृष्णा राज केन्द्र सरकार में एग्रीकल्चर मिनीस्टर तो बन गई लेकिन इस गांव को गोद लिए हुए दो साल से ज्यादा का वक्त गुजर जाने के बाद भी इस गांव की दशा नहीं बदली…

Reality of Adarsh village, How Much Ideal adopted village of Union minister Krishna

तो क्या गांव वालों के आरोप सच्चे है ये जानने के लिए हम गांव में आगे बढ़े… जब हम गांव के अंदर दाखिल हुए तो जर्जर सड़कों ने हमारा स्वागत किया… गांव की ज्यादातर सड़कें कच्ची है… एक-दो सड़क को छोड़ दें तो पूरे गांव की सड़कों का यहीं हाल है…कई सड़कें सालों पहले बनी थे लेकिन आज यहां इन सड़कों का नामोनिशान नहीं दिखता… ना नाली की समुचित व्यवस्था और ना अच्छी सड़क… सड़कें टूटी हुई हैं और उनमें गंदगी भरी हुई है… एक तरह से कहे तो पूरा गांव ही गंदगी और जल जमाव से भरा पड़ा है…

गांव में जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं…ऐसे में हैंडपंप के पास ही पानी जमा हो रहा है जो हैंडपंप के पानी को दूषित कर रही है…गांव वाले शुद्ध पानी के लिए तरस रहे हैं… गांव में तीन साल पहले पानी की टंकी का निर्माण कार्य शुरू हुआ था… लेकिन टंकी का निर्माण कार्य आज भी अधूरा पड़ा है…

उधर पीएम मोदी के खुले में शौच के खिलाफ चल रहे अभियान का भी बुरा हाल है… जहां देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ओडीएफ मिशन के तहत घर-घर शौचालय बनाने की बात कर रहे है वहीं उनकी ही मंत्री के गोद लिए गांव में तस्वीर हैरान करने वाली है… गांव वालों का कहना है कि इस पूरे गांव में सिर्फ 20 प्रतिशत शौचालय ही बने हैं… जिसकी वजह से ज्यादातर गांववाले खुले में ही शौच के लिए मजबूर हैं…

जब हमने अपने तहकीकात को आगे बढ़ाया तो बिजली जैसी बुनियादी जरूरत भी सवालों के घेरे में आ गई…गांव में हमें बिजली के खंभे-तार और ट्रांसफॉर्मर नजर आई… घरों में बिजली के मीटर भी नजर आए… लोकिन गांव वालों का आरोप है कि नवादा गांव में बिजली के खंभे तो लगे है लेकिन इन तारों में करंट कभी कभार ही आता है… अगर एक बार बिजली की तार टूट जाए या ट्रांसफर्मर में कोई खराबी आ जाए तो उसे ठीक होने के लिए गांववालों को महीनों का इन्तजार करना पड़ता है…

चलिए अब आपको नवादा दरोबस्त आदर्श गांव में शिक्षा व्यवस्था का हाल दिखाते हैं… गांव में प्राथमिक और जूनियर स्कूल समेत राजकीय हाई स्कूल भी है लेकिन सभी स्कूल अव्यवस्था की शिकार हैं…वहीं गांव में कोई इंटर या डिग्री क़ॉलेज नहीं है… ऐसे में 10वीं की पढ़ाई के बाद ज्यादातर बच्चे पढ़ाई छोड़ देते है…चलिए अब गांव के प्राथमिक स्कूल का जायाजा लेते है… प्राथमिक स्कूल में 146 बच्चे हैं लेकिन जब हम यहां पहुंचे तो हमें सिर्फ एक बच्चा ही नजर आया…

चलिए अब आपको यहां के पूर्व माध्यमकि यानि मिडिल स्कूल का भी हाल दिखा देते है…वैसे तो स्कूल के रजिस्टर में यहां 152 छात्र-छात्राओं के नाम दर्ज हैं लेकिन जब हम यहां पहुंचे तो हमें क्लास में महज आठ-दस बच्चे ही नजर आए… प्रिंसिपल साहब के मुताबिक खेती-बाड़ी और शादी के मौसम की वजह से बच्चों की उपस्थिति कम है

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यहां के हाई स्कूल में करीबन 250 छात्र और छात्राएं है और उन्हें पढ़ाने के लिए केवल दो टीचर की ही यहां नियुक्ति की गई हैं…वहीं यहां भी समस्याओं का अंबार लगा हुआ है… स्कूल में बिजली कनेक्शन कटा हुआ है… पंखा महज शो पीस बना हुआ है और पानी के लिए लगा हैंडपंप भी खराब है…

किसी भी आदर्श गांव में स्वास्थ्य सुविधाओं का होना बुनियादी शर्त है लेकिन शाहजहांपुर सांसद और केन्द्रीय मंत्री कृष्णाराज के गोद लिए गांव नवादा दरोबस्त में स्वास्थ्य सुविधाएं नदारत है…गांव वालों का आयुर्वेदिक पद्धति से उपचार के लिए कभी यहां आयुर्वेदिक अस्पताल हुआ करती थी, अब वो भी बंद हो चुकी है…

गांव में एलोपेथिक इलाज के लिए कोई स्वास्थ्य केन्द्र नहीं है… बीमार होने पर यहां के लोगों का एक मात्र सहारा आयुर्वेदिक अस्पताल हुआ करती थी लेकिन उसके भी बंद हो जाने से लोगों को परेशानी काफी बढ़ गई है… गांव को गोद लिए जाने पर लोगों में उम्मीद जगी थी कि अब तो गांव में स्वास्थ्य केन्द्र खुलेगा लेकिन दो साल बीत जाने के बाद भी उम्मीदें पूरी नहीं हुई… हाल ये है कि इलाज के लिए लोगों को 25 – 30 किलोमीटर दूरी तय करनी पड़ती है…कई बार तो दूरी की वजह से वक्त पर इलाज नहीं मिलने पर कई मरीजों की मौत हो जाती है

कुल मिलाकर नवादा गांव को गोद लेने के बाद इस गांव में विकास कार्य की बात करें तो पिछले दो सालों में यहां 24 सोलर लाइट्स लगीं हैं… एक बैंक की शाखा खुली है… और एक पानी की टंकी बन रही है…इसके अलावा यहां कोई विकास कार्य नजर नहीं आता…जिस वक्त सांसद कृष्णा राज ने इस गांव को गोद लिया था तो लोगों में उम्मीद जागी थी कि विकास को तरस रहे नवादा दरोबस्त गांव में विकास होगा…सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत नवादा गांव को गोद लेकर कृष्णाराज ने इसे वीआईपी गांव का तमगा तो दे दिया लेकिन गांव के हालात नहीं बदल सकी… अब देखना हे कि मोदी सरकार की मंत्री कृष्णा राज कब तक पीएम मोदी और नवादा गांव के सपने को साकार करतीं है

—पीयूष रंजन, आउटपुट

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