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देश में दलित उत्पीड़न की खबरें अक्सर आती रहती हैं। दलितों को लेकर भेदभाव किया जाता है। दुनिया भर में चर्चा होती है कि भारत में प्रतिदिन कितने दलित और आदिवासी ज्यादती का शिकार होते हैं। मंदिर में प्रवेश से लेकर स्कूल में एडमिशन लेने तक में दलितों को तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब मेरठ के एक सरकारी स्कूल में दलित बच्चों को प्रवेश नहीं देने का मामला सामने आया है जिसके बाद परिजनों ने स्कूल पहुंचकर जमकर हंगामा किया। लेकिन बाद में स्कूल के बाहर बढ़ता हंगामा देखकर प्रिंसिपल ने बच्चों को एडमिशन दे दिया। वहीं इस पूरी घटना पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने तत्काल कार्रवाई करते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं।

बताया जा रहा है कि मेरठ के गांव पछाली पट्टी के एक सरकारी प्राइमरी स्कूल में जोगियान मोहल्ले में रहने वाली एक महिला अपने दो बच्चों का एडमिशन कराने गई थी। आरोप है कि स्कूल के प्रिंसिपल रहीसुद्दीन ने बच्चों का एडमिशन लेने से इनकार करते हुए महिला को वापस भेज दिया। इसके बाद महिला ने अपने घर जाकर मोहल्ले के लोगों को यह बात बताई।

वहीं स्थानीय लोगों ने स्कूल के बाहर पहुंचकर हंगामा करते हुए कहा कि प्रिंसिपल बच्चों के सिर्फ दलित जाति का होने के कारण ही उन्हें प्रवेश नहीं दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का दबाव बढ़ता देख प्रिंसिपल रहीसुद्दीन ने तत्काल बच्चों को प्रवेश की इजाजत दे दी।

वहीं प्रिंसिपल का कहना है कि बच्चों की मां पहले आईडी प्रूफ नहीं लेकर आई थी, इसी कारण उन्हें पूरे दस्तावेजों के साथ आने के लिए कहा गया था। उधर मामले की जानकारी मिलने के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी सतेन्द्र ढाका ने कहा कि स्कूल प्रशासन आईडी ना होने की स्थिति में भी प्रवेश से इनकार नहीं कर सकता। ऐसे में इस मामले के संज्ञान में आने के बाद इसकी जांच के आदेश जारी किए गए हैं।

ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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