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राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ की ओर से दिल्ली में आयोजित ‘भविष्य का भारत’ कार्यक्रम के दूसरे दिन RSS प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि संघ संविधान को मानकर चलता है। संविधान के खिलाफ जाकर हमने कोई काम किया हो, ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है। उन्होंने संघ और राजनीति के बीच संबंधों पर भी खुलकर बात की।

वहीं सरकार के कामकाज में दखल के आरोपों और अटकलों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि लोग कयास लगाते हैं कि नागपुर से फोन जाता होगा, यह बिल्कुल गलत बात है।  दिल्ली में बैठे लोग सक्षम हैं। भागवत ने साफ कहा कि नागपुर से सरकार नहीं चलती है।

मंगलवार को उन्होंने कहा, ‘केंद्र में काम कर रहे काफी लोग स्वयंसेवक हैं। प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति आदि स्वयंसेवक रह चुके हैं ऐसे में कई तरह की बातें होती हैं। वास्तव में ये लोग मेरी उम्र के हैं तो राजनीति में वे मुझसे सीनियर हैं। संघ कार्य का जितना मेरा अनुभव है उससे ज्यादा अनुभव उनका राजनीति का है। उनको अपनी राजनीति चलाने के लिए किसी की सलाह की आवश्यकता नहीं है। हम सलाह दे भी नहीं सकते हैं।’ भागवत ने यह जरूर कहा कि हां, उन्हें सलाह चाहिए और हम दे सकते हैं तो हम देते हैं।


भागवत ने कहा कि संघ का प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता है। हम प्रभाव बढ़ाने के लिए काम नहीं करते हैं। ऐसे में संघ का राजनीति से संबंध चला आ रहा है। व्यक्ति निर्माण हमारा मुख्य काम है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के लिए एक विचार को लेकर, एक नीति का स्वप्न लेकर काम करने वालों के पीछे खड़े हो जाओ- ऐसा हम जरूर कहते हैं। वह नीति किसी भी दल की हो सकती है। राष्ट्रहित की सोचकर स्वयंसेवक नागरिक के नाते अपना कर्तव्य करते हैं।

आरएसएस चीफ भागवत ने कहा कि हम कहते हैं कि हमारा हिंदू राष्ट्र है। हिंदू राष्ट्र है इसका अर्थ ये कतई नहीं है कि इसमें मुसलमान नहीं चाहिए, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन ये कहा जाएगा कि यहां मुस्लिम नहीं चाहिए, उस दिन वो हिंदुत्व नहीं रहेगा।

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