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राम मंदिर मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी ने दिये इंटरव्यू के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने प्रतिक्रिया दी है। संघ की ओर से ट्वीट कर कहा गया कि हमें प्रधानमंत्री का बयान एक सकारात्मक कदम लगता है।

संघ ने ट्वीट किया कि प्रधानमंत्री का अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर बनाने के संकल्प का अपने साक्षात्कार में पुनः स्मरण करना यह भाजपा के पालमपुर अधिवेशन(1989) में पारित प्रस्ताव के अनुरूप ही है। संघ ने कहा है कि जनता ने उन पर विश्वास व्यक्त करते हुए बहुमत दिया। इस कार्यकाल में सरकार वह वादा पूर्ण करे, ऐसी भारत की जनता की अपेक्षा है।

RSS के सह सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले की तरफ से जारी बयान में कहा गया, ‘प्रधानमंत्री जी का वक्तव्य मंदिर निर्माण की दिशा में सकारात्मक कदम लगता है। प्रधानमंत्री ने अयोध्या में श्रीराम के भव्य मंदिर बनाने के संकल्प का अपने साक्षात्कार में पुनः स्मरण करना यह बीजेपी के पालमपुर अधिवेशन (1989) में पारित प्रस्ताव के अनुरूप ही है। इस प्रस्ताव में बीजेपी ने कहा था कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर भव्य राममंदिर बनाने के लिए परस्पर संवाद से अथवा सुयोग्य कानून बनाने (Enabling Legislation) का प्रयास करेंगे।’

होसबोले ने आगे कहा, ‘नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2014 के बीजेपी के चुनावी घोषणापत्र में अयोध्या में राममंदिर बनाने के लिए संविधान के दायरे में उपलब्ध सभी संभव प्रयास करने का वादा किया। भारत की जनता ने उन पर विश्वास व्यक्त कर बीजेपी को बहुमत दिया है। इस सरकार के कार्यकाल में सरकार वह वादा पूर्ण करे ऐसी भारत की जनता की अपेक्षा है।’

गौरतलब है कि पीएम मोदी ने समाचार एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में कहा है, ‘हम बीजेपी के घोषणापत्र में कह चुके हैं कि कानूनी प्रक्रिया के तहत राम मंदिर मसले का हल निकाला जाएगा।’ उन्होंने कहा कि पहले कानून प्रक्रिया पूरी होने दीजिए, उसके बाद अध्यादेश के बारे में विचार किया जाएगा।’ प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कोई इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि 70 साल में जितनी भी सरकारें आईं उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे को रोकने की भरपूर कोशिश की है।

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