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केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर के द्वार शाम पांच बजे खुल गये इस दौरान सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त रहा। सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले के बाद से महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन हुआ। सुबह आठ बजे पुलिस ने बैरिकेड हटाए और पांबा से श्रद्धालुओं को यात्रा करने की इजाजत दी। निलक्कल और एरुमेली में सैकड़ों श्रद्धालु बहस करते हुए दिखाई दिए क्योंकि उन्होंने लगातार आगे बढ़ने पर पुलिस की बाधाओं का सामना करना पड़ रहा था।

श्रद्धालु जब गर्भगृह पहुंचने का प्रयास कर रहे थे, तो उनसे उनके पहचान पत्रों की जांच कराने व सवालों के जवाब देने का आग्रह किया गया। गर्भगृह मंगलवार रात 10 बजे बंद होगा। एरुमेली में सभी श्रद्धालुओं के वाहनों को रोका गया। केरल राज्य परिवहन निगम के बस डिपो पहुंचने पर श्रद्धालुओं ने विरोध किया और भगवान अयप्पा के नारे लगाए। उन्होंने पहाड़ी पर स्थित मंदिर के लिए आगे बढ़ने हेतु परिवहन की मांग की।

एक गुस्साए प्रदर्शनकारी ने कहा, “हमें रविवार रात से इंतजार करने को कहा गया है। हम सभी तीर्थयात्रा पर आए हैं और हमारी कोई अन्य इच्छा नहीं है। हमारे वाहनों को इजाजत दी जानी चाहिए। केएसआरटीसी को हमे ले जाने के लिए बसों का इंतजाम करना चाहिए।”

प्रदर्शनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पुलिस ने एरुमेली से निलक्कल तक निजी वाहनों को जाने की इजाजत दे दी। यात्रा के लिए कड़े सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। राज्य द्वारा शनिवार को मंदिर की सुरक्षा का जिम्मा अपने ऊपर लेने के बाद 2,300 से ज्यादा पुलिस अधिकारी तीर्थयात्रा मार्ग की विभिन्न जगहों पर तैनात हैं।

विभिन्न नाकों पर कई मेटल डिटेक्टर लगाए गए हैं और साथ ही भीड़ को नियंत्रित करने के भी इंतजाम किए गए हैं। मीडिया को सुबह सवा नौ बजे मार्ग पर जाने की इजाजत दी गई।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 से 50 साल की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश से रोकने की सदियों पुरानी परंपरा को गलत बताते हुए उसे खत्म कर दिया था और सभी आयुवर्ग की महिलाओं को प्रवेश करने की इजाजत दी थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 17 अक्टूबर को पहली बार कपाट खुले थे और अब खुल रहे हैं।

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