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उत्तर प्रदेश को उत्तम प्रदेश बनाने के लिए योगी सरकार प्रयासरत है। इसके लिए ‘कानून’ व्यवस्था से लेकर ‘स्वच्छ’ व्यवस्था तक सब कुछ बदला जा रहा है। योगी सरकार स्कूल, कॉलेज, सड़क, सचिवालय, मंदिर आदि सबकुछ  नीट एंड क्लीन चाहती है। लेकिन इसको सिर्फ भगवा रंग के चादर से नीट एंड क्लीन करना, ये विपक्षियों और उलेमाओं को रास नहीं आ रहा है। सचिवालय को केसरिया रंग में रंगने के बाद लखनऊ स्थित हज हाउस की बाहरी दीवारों को भी अब भगवा रंग में रंग दिया गया है। ऐसे में उलेमाओं और मुस्लिम संगठनों ने इसका विरोध किया है। उधर, विपक्ष का आरोप है कि इसके जरिए सरकार ‘अपने भगवा एजेंडे को लागू करने’ और ‘मुस्लिमों को उक़साने’ की कोशिश कर रही है।

बता दें कि लखनऊ के विधानसभा मार्ग पर हज कमेटी का दफ़्तर है। हज आफिस का काम यूपी के लोगों को हज पर भेजने का इंतजाम करना है। इसकी इमारत का रंग हमेशा सफेद रहा है। यूपी में इसके पहले सीएम योगी आदित्यनाथ का आफिस भी भगवा रंग में रंगा जा चुका है। यही नहीं करीब 100 प्राइमरी स्कूल, बहुत सारे थाने वगैरह भगवा रंग में रंगे जा चुके हैं। ऐसे में विपक्षी खेमा काफी नाराज है। योगी सरकार के इस कदम से विपक्षियों ने सरकार को घेरना चालू कर दिया है। उनका कहना है कि सरकार इस मामले में मजहबी जज्बात कुरेदने में जुटी है। उलेमाओं ने योगी सरकार से अपील करते हुए कहा कि हज हाउस का भगवाकरण ना करें।

वहीं योगी सरकार में इक़लौते मुस्लिम मंत्री मोहसिन रज़ा कहते हैं कि, ‘केसरिया रंग से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है। इसका इस्तेमाल करने में क्या दिक्कत है।’ हालांकि पार्टियों द्वारा इमारतों से लेकर डिवाइडरों तक तमाम चीजों को अपने पसंदीदा रंग में रंगने का चलन नया नहीं है। पूर्व में समाजवादी और बहुजन समाजवादी पार्टी भी ऐसा कर चुकी हैं।

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