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भगवा प्रेम यूपी में दिल खोलकर बरस रहा है। सीएम योगी को भगवा रंग पसंद है तो अफसर सीएम योगी आदित्यनाथ को खुश करने के लिए, जो करें उन्हें कम ही लगता है। यूपी में सबसे पहले भगवाकरण की शुरुआत तब हुई जब एनेक्सी भवन की दीवारों को भगवा रंग से रंग दिया गया। पहले हज हाउस की दीवार भगवा रंग में रंगी गई। जब विवाद हुआ तो उसे फिर से क्रीम रंग से पुतवा दिया गया। फिर सरकारी स्कूलों की दीवारों को भी भगवा रंग से नहला दिया गया। लखनऊ के गोमती नगर स्थित साइकिल पथ पर लगे डिवाइडर भी भगवा दिखने लगे। ऐसे में पार्क की दीवारें भगवा रंग में कैसे नहीं पुती जाती। यही नहीं योगी सरकार के 100 दिन पूरे होने के मौके पर जो बुकलेट छापी गई थी उसका मुख पृष्ठ भगवा रंग का था। फिर रोडवेज बसों की सीटें भगवा हुईं। इसी कड़ी में अब टोल प्लाजा भी भगवा दिख रहा है।

ये नजारा मुजफ्फरनगर-सहारनपुर फोर लाइन हाइवे का है। इस पर स्थित एक टोल प्लाजा को भी भगवा रंगवा दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि प्लाजा की डिजाइन में ही भगवा रंग शामिल था। टोल प्लाजा के सीनियर मैनेजर शायद ज्यादा ज्ञानी हैं ये भी बताने से नहीं चूके कि, डिजाइन में ही रंग भी शामिल होता है।

बहरहाल ये भगवा टोल प्लाजा अभी ट्रॉयल के लिए खोला गया है। इसे जनता के लायक बनाने के लिए सरकार से नोटिफिकेशन का इंतजार है। वैसे सीएम योगी आदित्यनाथ को खुश करने के लिए अफसर उनके दौरे से पहले शौचालय में भगवा टाइल्स लगवाकर फटकार तक खा चुके हैं। लेकिन जब सीएम योगी आदित्यनाथ को ही भगवा रंग पसंद हो तो अधिकारी फटकार खाने तक को भी तैयार हैं।

बीजेपी केसरिया रंग को खासा तवज्जो देती रही है, अब समाजवादी पार्टी योगी सरकार पर प्रदेश का भगवाकरण करने का आरोप लगाए या इसे अल्पसंख्यक विरोधी कदम बताए किसी को क्या फर्क पड़ता है। क्योंकि, सरकार तो भगवा को पसंद करने वालों की ही है।

                                                                                                                ब्यूरो रिपोर्ट, एपीएन

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