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एससी/एसटी एक्ट को लेकर हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद से दलित समाज ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के विरोध में दलित समुदाय और आदिवासी संगठन के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। इसी कड़ी में कोर्ट का विरोध करते हुए दलित समाज ने आज भारत बंद का एलान किया है, जिसका असर सड़कों पर दिखाई भी दे रहा हैं। सोमवार तड़के उड़ीसा के संभलपुर में विरोधी तत्व रेल पटरियों पर जमा हो गए और ट्रेनों की आवाजाही भी रोक दी। वहीं लगातार बढ़ रहे आंदोलन के बीच केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर कर दी है।


वहीं इस मामले में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनरत दलितों के पक्ष में ट्वीट किया है।

इस आंदोलन में दलितों का उग्र रूप दिखाई दे रहा हैं। जिसका असर पंजाब में भी देखने को मिला, जहां 10वीं और 12वीं की परीक्षा स्थगित कर दी गई। तो वहीँ दूसरी ओर बिहार के आरा में प्रदर्शनकारियों ने ट्रेन रोक दी, साथ ही पेट्रोल पंप और बसों में तोड़फोड़ की।

किस फैसले ने उकसाया दलित आंदोलन

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट में नई गाइडलाइन जारी करते हुए कहा था, कि एससी एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं की जाएगी। पहले आरोपों की डीएसपी स्तर पर जांच की जाएगी और उसके बाद अगर आरोप सही साबित होते हैं तो आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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इस एक्ट में बदलाव करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एके गोयल और यूयू ललित की बेंच ने बताया, कि जिस वक्त ये कानून बनाया गया था तब किसी को अंदेशा ही नहीं था कि इसका दुरपयोग भी हो सकता है। जजों ने बताया, कि हमने कई मामलों में पाया कि इस एक्ट का दुरुपयोग किया जा रहा है।

वही इस मामले में बिहार के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने भी दलितों के आंदोलन का समर्थन करते हुए ट्वीट किया है।

वही इस बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बयान देते हुए कहा है कि सरकार दलितों की बात सुनने को तैयार है।


केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने और मुक्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद अब देखने वाली बात ये होगी कि दलितों द्वारा छेड़ा गया आंदोलन अब आगे क्या रूख लेता है।

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