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देवरिया शेल्टर होम में बच्चियों से देह व्यापार और शोषण की जांच अभी जारी ही है, इस बीच शनिवार को  उत्तर प्रदेश के मेरठ के राजकीय बालगृह में रह रहे बच्चे के साथ यौन शोषण की खबर सामने आई है। खबर है कि बालगृह के अंदर ही एक संविदाकर्मी बच्चे का लंबे समय से यौन शोषण कर रहा था। वहीं जब मजिस्ट्रेट की जांच में इस मामले का खुलासा हुआ तो आनन-फानन में चुपचाप केस दर्ज करके आरोपी संविदाकर्मी जावेद अंसारी को जेल भेज दिया गया।

आरोप है कि संविदा कर्मी ने जान से मारने की धमकी देकर कई बार इस घिनौनी करतूत को अंजाम दिया। डरे सहमे पीड़ित बच्चे ने इसकी शिकायत पुलिस से की। इस घटना के खुलासे के बाद बाल गृह में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में पूरे मामले पर मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए।

हालांकि फजीहत से बचने के लिए प्रशासन ने इस पूरे मामले को 7 दिन तक दबाए रखा। इसके बाद गुपचुप तरीके से थाना नौचंदी में मुकदमा दर्ज कर के आरोपी को जेल भेज दिया। इतना ही नहीं इस पूरे मामले पर थाना पुलिस और बाल गृह से जुड़े अधिकारी कुछ भी बताने को तैयार नहीं है।

फिलहाल प्रशासन ऐसे मामले ना हो इस पर अपना नजर बनाई हुई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि देवरिया कांड के बाद सीएम ने जिला अधिकारी को खुद जाकर बाल संरक्षण गृह और महिला संप्रेक्षण गृह में जांच के निर्देश दिए थे। डीएम ने एडिशनल सिटी मजिस्ट्रेट सदर को इस मामले में गहन जांच करने के आदेश दिये है। एसीएम सदर अमिताभ यादव ने मामले की प्रारंभिक जांच भी डीएम को सौंप दी है।

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