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बॉलीवुड में सबको खामोश करने वाले अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा जब राजनीति में आए तो किसी ने नहीं सोचा होगा कि उनके राजनैतिक कैरियर में ये भी सुनना पड़ेगा। जी हां, जानकर हैरानी होगी कि पटना साहिब लोकसभा सीट से सांसद बने शत्रुघ्न सिन्हा ने सदन में आखिरी सवाल 2010 के आखिरी महीने में पूछा था। इसके बाद वो तब से अब तक खामोश ही हैं। इसके साथ ही यह दूसरा मौका है जब इलाके की जनता ने उनकी तलाश शुरू की है। हाल ही में उनकी गुमशुदगी की तहरीर दी गई। लोकसभा चुनाव के दौरान भी उनकी तलाश में जगह-जगह पोस्टर चस्पा हुए थे।

हालांकि यह तो सभी जानते हैं कि कभी-कभी किसी मुद्दे पर वो अपने ही पार्टी के खिलाफ जाकर खड़े हो जाते हैं। कई बार उनका और उनके पार्टी के बीच विरोधाभास देखा गया है। सदन के बाहर मीडिया के सामने तो उन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ कई तंज कसे लेकिन सदन में जनता के लिए उनके मुंह से एक भी शब्द नहीं निकले। सांसद शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ बिहारी बाबू की तलाश इस बार उन्हीं की पार्टी के लोग कर रहे। वे इलाकाई लोग हैं, लेकिन पिछली बार उन्हें ढूंढने वालों में भाजपा के लोग आगे नहीं थे। मुमकिन है कि यह सियासत हो, लेकिन बिहारी बाबू से कोई जवाब भी नहीं मिल रहा। वे भरसक सवाल भी नहीं पूछते। लोकसभा का उनका रिकार्ड तो यही बता रहा है। न कोई सवाल, न बहस में भागीदारी और ना ही किसी तरह का प्राइवेट बिल। उपस्थिति 68 प्रतिशत है।

बता दें कि बिहार के लोकसभा में 40 सांसद हैं। जिनमें से किसी की भी उपस्थिति 100 प्रतिशत नहीं। अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा से पीछे मात्र दो बिहारी सांसद और हैं।  भाजपा अध्यक्ष नित्यानंद राय और लोजपा के रामकिशोर उर्फ रामा सिंह। इन दोनों की उपस्थिति का ग्राफ 67 प्रतिशत है।

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