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उत्तर प्रदेश के देवरिया में बालिका गृह कांड की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) की दो सदस्यीय टीम पुलिस की शुरूआती जांच रिपोर्ट से कतई संतुष्ट नहीं दिख रही है। आधिकारिक सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि एसआईटी की जांच में स्थानीय पुलिस की जांच बेदम नजर आ रही है। जांच कर रही एसआईटी की टीम ने पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय से भी पूछताछ किया है और वह एसआईटी के सवालों पर कहीं कहीं असहज भी दिखे।

सूत्रों के अनुसार देवरिया पुलिस ने जिन कारों को बालिका गृह में आने की कहीं थी। वह अपनी शुरूआती जांच की अपनी विवेचना में कारों को प्रकाश में नहीं ला सकी। सोमवार को उच्च न्यायालय ने पुलिस की जांच को सवालों के घेरे में लेते हुये सरकार से कई सवाल भी पूछे थे। उत्तर प्रदेश सरकार की सिफारिश पर केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जल्द ही मामले को अपने हाथ में लेगी।

गौरतलब है कि देवरिया रेलवे स्टेशन के पास पुलिस ने पांच अगस्त को देर रात बालिका गृह पर छापा मार कर 24 बच्चों को मुक्त कराने का दावा किया था। उसी रात पुलिस अधीक्षक रोहन पी कनय ने आनन फानन में पुलिस लाईन में संवाददाता सम्मेलन में जानकारी दी थह कि कथित बालिका गृह में अनैतिक कार्य होता था।

पुलिस अधीक्षक ने पत्रकारों को बताया था कि बालिका गृह से भाग कर पुलिस के पास आयी एक लड़की ने बताया कि संस्था में काले और सफेद रंग की कार शाम को आती थी जिसमें दीदी लोग को ले जाया जाता था और दीदी लोग को सुबह चार पांच बजे कार छोड़ जाती थी। उसका कहना था कि दीदी लोग आने पर केवल रोती थी और पूछने पर कुछ बताती नहीं थी। पुलिस ने इस मामले में बालिका गृह की संचालिका गिरिजा त्रिपाठी उसके पति मोहन त्रिपाठी और उसकी बेटी को कचंनलता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

साभार-ईएनसी टाईम्स

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