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आप और हम जैसे लोगों के लिए कबूतर खरगोश जैसे जानवर क्या हैं। पशु और पक्षी लेकिन जुआरियों और सट्टे बाजों के लिए ये कमाई का जरिया हैं। लोगों की किस्मत बनाते और बिगाड़ते हैं। मेरठ में सामने आए एक मामले से ऐसा ही कुछ दिखाई दे रहा है। यहां चिड़िया और कबूतर के नाम पर पर्ची खुलती थी और हजारों का दांव लगता था। पुलिस ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया है। मेरठ पुलिस के हत्थे चढ़े इन सट्टेबाजों ने अपने काले कारनामों को अंजाम देने के लिए पशु पक्षियों को ही हथियार बना लिया था।

शातिर दिमान सट्टेबाजों ने ऐसी योजना बनाई थी कि पुलिस भी गच्चा खा गई थी। सट्टेबाज चिड़िया और कबूतर के नाम पर पर्ची खोलते थे। चिड़िया की पर्ची खुलने पर लोगों की किस्मत संवर जाती थी। कबूतर के नाम की पर्ची खुली तो किस्मत डूब जाती थी। मतलब ये कि चिड़िया के फोटो वाली पर्ची के अंदर जो नंबर लिखा होता था। उससे कई गुना ज्यादा रमक जीतने वाले को मिलती थी। जबकि कबूतर के छाप वाली पर्ची खुलने पर उस लगी रकम डूब जाती थी। बेजुबान पक्षियों को अपने काले कारनामे का माध्याम बनाने वाले आठ शातिर सट्टेबाज अब सलाखों के पीछे पहुंच गए हैं। इस खेल के शिकार ज्यादातर मध्यमवर्ग  और गरीब तबके के लोग ही होते थे।

सट्टेबाज मोटी रकम कमाने का लालच देकर इन्हें अपनी जाल में फंसाते थे। और उनकी मेहनत की कमाई को चट कर जाते थे। क्योंकि किस्मत तो किसी किसी की खुलती थी। ज्यादातर लोगों का खेल खराब ही होता था। मेरठ के थाना ब्रह्मपुरी क्षेत्र के आलोक विहार कॉलोनी में ये सट्टे का अड्डा चल रहा था।गिरोह के कई सदस्य अभी फरार भी हैं। पुलिस उनकी तलाश करने के साथ ही इस मामले की जांच भी कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां तक फैले हैं।

                                                – ब्यूरो रिपोर्ट,एपीएन

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