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श्रीलंका में दो महीने तक चली राजनीतिक उठापटक के बाद रविवार को यूनाइटेड नेशनल पार्टी के नेता रानिल विक्रमसिंघे ने एक बार फिर से प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना ने राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में विक्रमसिंघे को प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलायी। इसी के साथ श्रीलंका में दो महीने से चल रहा राजनीतिक संकट खत्म हो गया है। गौरतलब है कि 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति सिरीसेना ने प्रधानमंत्री विक्रमसिंघे को पद से हटाकर पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे को प्रधानमंत्री नियुक्त कर दिया था।

राजपक्षे जब 225 सदस्यीय संसद में बहुमत साबित नहीं कर पाये तो राष्ट्रपति सिरीसेना ने संसद को भंग कर चुनाव कराने की घोषणा कर दी थी। राष्ट्रपति के कदम को श्रीलंका के उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी गयी। उच्चतम न्यायालय ने 13 नवंबर को राष्ट्रपति की राजपत्रित अधिसूचना को अस्थायी रूप से अवैध घोषित करके चुनाव तैयारियों पर रोक लगाने का अंतरिम आदेश दिया। उच्चतम न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि राष्ट्रपति की संसद को भंग करने की अधिसूचना संविधान सम्मत नहीं है।

श्रीलंका की एक निचली अदालत ने भी राजपक्षे और उनकी मंत्रिपरिषद को सरकारी कामकाज में हिस्सा न लेने का आदेश जारी किया था। उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत के आदेश के खिलाफ दायर राजपक्षे की पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। इसके बाद शनिवार को राजपक्षे ने पद से इस्तीफा देकर विक्रमसिंघे को दोबारा प्रधानमंत्री नियुक्त करने का मार्ग प्रशस्त किया।

श्रीलंका के समाचार पत्र कोलंबो पेज के अनुसार सोमवार को विक्रमसिंघे की मंत्रिपरिषद का गठन किया जाएगा। वार्षिक बजट बनने तक आवश्यक प्रावधानों को पूरा करने के लिए लेखा अनुदान पास किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार श्री विक्रमसिंघे के मंत्रिमंडल में 30 सदस्य होने का अनुमान है जिसमें श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के छह सांसद शामिल होंगे।

-साभार, ईएनसी टाईम्स

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