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लक्ष्य अगर सुदृढ़ हो तो मंजिल मिल ही जाती है, ऐसा ही कारनामा कर दिखाया हैदराबाद के मोहन अभ्यास ने, जिसकी कल्पना करना सबके बस की बात नहीं होती। 17 वर्षीय मोहन ने ज्वाइंट एंट्रेंस एक्ज़ाम (JEE) एडवांस्ड में 64वीं रैंक हासिल कर भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के चार आला आईआईटी (बम्बई, कानपुर, दिल्ली और चेन्नई) में अपनी जगह सुनिश्चित कर ली है। आपको लगेगा की इसमें कौन सी नई बात है? तो जनाब हम आपको बताते हैं कि देश के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान में जगह बनाने वाले दूसरे छात्रों और उनमें जो अहम फर्क है, वो यह है कि मोहन का परिवार आर्थिक रूप से संपन्न नहीं है। मोहन के माता-पिता घर में समोसा बनाकर बेचने का काम करते हैं। जिसमें मोहन अपने माता-पिता का सहयोग करते हैं।

मोहन का सपना, बनूंगा वैज्ञानिक

मोहन ने एक निजी समाचार पत्र को दिए बयान में कहा,’कॉलेज के दौरान जेईई के लिए मैंने हर दिन दस घंटे पढ़ाई की, जिसका परिणाम है कि मैं जेईई में 64वीं रैंक हासिल कर सका। मैंने अभी तय नहीं किया है कि किस ब्रांच में पढ़ाई करनी है लेकिन मेरा रुझान भौतिक विज्ञान से जुड़े क्षेत्र में वैज्ञानिक बनने का है।

उधर, बिहार स्थित नालंदा जिले के कराय-पशुराय निवासी अरबाज आलम ने सारी मुसीबतों को हराकर जेईई एडवांस में सफलता प्राप्त की। बता दें कि अरबाज एक गरीब तबके का एक साधारण सा लड़का है जिसके पिता मोहम्मद शकील अहमद, कराय-पशुराय रोड पर हर दिन अंडे की दुकान लगाते हैं। अरबाज ने कहा,’गरीब घर में जन्म लेने का मतलब है कि गरीबी आपके पग-पग पर बांधा उत्पन करेगी, लेकिन मन में सच्ची लगन, मेहनत और दृढ़ संकल्प हो तो हर बाधाएं दूर हो जाती है।’

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