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‘पद्मावत’ पर देश के हालात दिन ब दिन बिगड़ते जा रहे हैं।  एक तरफ देश की सर्वोच्च न्यायालय का फैसला तो दूसरी तरफ करणी सेना का फैसला, एक तऱफ राज्यों की कानून व्यवस्था तो दूसरी तरफ करणी सेना की धमकी, एक तरफ जनता की आजादी तो दूसरी तरफ करणी सेना की पांबदी, एक तरफ देश का संविधान तो दूसरी तरफ देश में मचने वाला उत्पात। अब कौन किस पर भारी पड़ेगा, ये सब राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन, और जनता के उन वर्गों पर निर्भर करेगा जो जाति, धर्म, मान-सम्मान बाद में और देश पहले देखते हैं। हालांकि राष्ट्रवाद और देशद्रोह का नारा अभी तक किसी ने नहीं दिया है। हालांकि इन मामलों में न्यायालय की अवमानना, बलवा जैसे दंडनीय अपराध का भी दोषी ठहराया जा सकता है।

बता दें कि फिल्म पद्मावत 25 जनवरी को पूरे देश में रिलीज होगी। सुप्रीम कोर्ट ने ‘पद्मावत’ के प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्यप्रदेश और राजस्थान की ओर से दायर याचिकाओं को आज खारिज कर दिया। उधर करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह कालवी, पद्मावत देखने से मना कर दिया है। उन्होंने फिल्म पर पूरी तरह से बैन लगाने की मांग की है। इसके साथ ही करनी सेना की ओर से फिल्म को लेकर विरोध भी बरकरार है। जबकि इससे पहले फि‍ल्‍म के प्रदर्शन का लगातार वि‍रोध करने वाले संगठन के प्रमुख लोकेंद्र सिंह कालवी ने सोमवार (22 जनवरी) को फि‍ल्‍म देखने की घोषणा कर दी थी। लेकिन अब उनका कहना है कि ‘भंसाली ग्रुप का पत्र आया था, लेकिन वह धोखा था, साजिश थी। वह चाहता था कि हम फिल्म देखने से इनकार कर दें। भंसाली फिल्म दिखाना नहीं चाह रहे हैं।

वहीं सुप्रीम कोर्ट में प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर और न्यायमूर्ति डी. वाई. चन्द्रचूड़ की पीठ ने  अपने आदेश में कहा है कि राज्य उसके 18 जनवरी के आदेश का पालन करें, कोई जरूरत होने पर, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के पास आने की पूर्ण स्वतंत्रता है। वहीं लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चेतावनी भरे अंदाज में कालवी ने कहा था, ‘हम कहते कम हैं करते ज्यादा हैं, हमारा यह संकल्प है कि देशभर में फिल्म लगने नहीं देंगे।’ इसके साथ ही राजस्थान में करणी सेना के प्रदेशाध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना का भी यही कहना है कि फिल्म किसी भी हाल में रिलीज नहीं होने दी जाएगी। इसमें इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया है।

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