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2जी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। सोमवार (12 मार्च) को मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच ने केंद्र सरकार, सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय को निर्देश दिया कि 2 जी के बाकी बचे मामलों की जांच छह महीने में पूरी की जाए। सुप्रीम कोर्ट बेंच ने जांच की धीमी गति पर नाराजगी जताई।

जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि यह देश के लिए एक अहम मामला है और देश को अंधेरे में नहीं रखा जा सकता। इतने साल बाद भी आखिरकार जांच पूरी क्यों नहीं हुई? कोर्ट ने पूछा कि आखिर कौन है जो जांच में बाधा बना हुआ है? सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार साल के बाद कोर्ट के पास ये मामला आया है। इस मामले में CAG ने जो सवाल उठाए थे उनके जवाब देश को चाहिए, चाहे कोई भी नतीजा निकले। कोर्ट ने केंद्र को इस संबंध में दो हफ्ते में स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई तीन अप्रैल को होगी।

वहीं एमिकस क्यूरे अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कोर्ट को बताया कि मुख्य मामला खत्म हो चुका है और ए राजा समेत सब आरोपी बरी हो चुके हैं। एयरसेल मैक्सिस केस में सीबीआई और ईडी के दो मामले अभी लंबित हैं। इसी मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस अरूण मिश्रा और जस्टिस नवीन सिन्हा की पीठ ने ASG तुषार मेहता को 2G केस में स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर बनाने के खिलाफ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन की अवमानना याचिका को भी खारिज कर दिया है। बेंच ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ ट्रायल के लिए ही स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर नियुक्त किया था और अब ट्रायल पूरा हो चुका है तो अपील के लिए केंद्र किसी और की नियुक्ति के लिए स्वतंत्र है। कोर्ट ने कहा कि इस मामले में केंद्र ने किसी तरह की अवमानना नहीं की है। वहीं पीठ ने स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर आनंद ग्रोवर की अर्जी को मंजूर करते हुए उन्हें इस पद से मुक्त कर दिया है।

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