सुशील मोदी का बयान, राम मंदिर अयोध्या में ही बनेगा नमाज कहीं भी अदा की जा सकती है

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देश में राम मंदिर का मुद्दा गरमाया हुआ है। इस बीच बिहार के उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान राम मंदिर को लेकर बयान दिया है। सुशील मोदी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जल्द से जल्द अयोध्या मामले पर पर सुनवाई कर फैसला दे।

सुशील मोदी ने पटना में एक सम्मान समारोह में सुप्रीम कोर्ट पर यह कहते हुए हमला बोला कि अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण करोड़ों हिन्दुओं की अभिलाषा है। उन्होंने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट आधी रात में कर्नाटक सरकार से जुड़े फैसले कर सकती है, समलैंगिकों पर फैसला कर सकती है तो फिर राम मंदिर का मामला वर्षों से अदालत में क्यों लटका है।

सुशील मोदी ने बार-बार अपने भाषण में कहा कि इस देश की जनता जानना चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने इस मामले की सुनवाई शुरू होने के बाद उसे टाल क्यों दिया? सुशील मोदी ने अपने भाषण में न केवल सर्वोच्च न्यायालय को करोड़ों हिंदुओं की जन भावना के अनुरूप फ़ैसला देने का सुझाव दिया, बल्कि मुस्लिम समाज के लोगों को भी ये सलाह दी कि उस जगह पर मस्जिद बनाने की ज़िद छोड़ दीजिए, क्योंकि मस्जिद कहीं भी बन सकती है, लेकिन राम मंदिर कहीं और नहीं बन सकता। क्योंकि राम का जन्मस्थान वहीं है।

वहीं जेडीयू का रुख इस मुद्दे को न छेड़ने का है। जेडीयू इस मुद्दे का समाधान कोर्ट के फैसले या सर्वसम्मति से चाहती है। इससे पहले केंद्रीय राज्यमंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि दुनिया की कोई ताकत राम मंदिर का निर्माण होने से नहीं रोक सकती है। उन्होंने आगे कहा कि आतंकियों के लिए आधी रात को कोर्ट खोल दिये जाते हैं लेकिन मंदिर का फैसला नहीं आने से जनता में काफी गुस्सा है। सरकार और कोर्ट को मिलकर इस मसले को सुलझाना होगा।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर सुनवाई को जनवरी तक टाल दी है। अब जनवरी में सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। कोर्ट आज अयोध्या की राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि को तीन भागों में बांटने वाले 2010 के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल एवं न्यायमूर्ति के एम जोसफ की पीठ इस मामले में दायर अपीलों पर सुनवाई की।

बता दें अयोध्या विवाद आज का नहीं बल्कि करीब साढ़े चार सौ साल से भी ज्यादा पुराना मामला है। राम मंदिर और बा‍बरी मस्जिद को लेकर दो समुदायों के बीच यह विवाद 1528 से ही चला आ रहा है। यहां पर कई बार इन दोनों पक्षों के बीच व‍िवाद हुआ। इस व‍िवाद ने सबसे ज्याादा उग्र रूप तब धारण किया जब 6 दिसंबर 1992 में हजारों की संख्या में कार सेवकों ने अयोध्या पहुंचकर बाबरी मस्जिद ढहा दिया था। इस घटना के बाद सांप्रदायिक दंगे हुए। मस्जिद की तोड़-फोड़ की जांच के लिए एम.एस. लिब्रहान आयोग का गठन हुआ।

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