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बॉलीवुड के सुपरस्टार रजनीकांत की एक्टिंग के लगभग सभी दिवाने हैं। साउथ में लोग उन्हें भगवान की तरह पूजते हैं, इतना ही नहीं लोग रजनीकांत का नाम बड़ी ही इज्जत के साथ लेते हैं। हाल के ही कुछ दिनों में रजनीकांत ने राजनीति में प्रवेश करने की आशंका जताई थी। उन्होंने यह भी कहा था कि अगर वह राजनीति में प्रवेश करेंगे तो पूरी ईमानदारी के साथ अपना कर्तव्य निभाएंगे।

रजनीकांत का राजनीति में जाने का फैसला शायद कुछ लोगों को सही नहीं लग रहा है। इसी को लेकर तमिल संगठन (तमिल मुन्नेत्र पदई) ने रजनीकांत के राजनीति में प्रवेश का विरोध करते हुए उनका पुतला फूंका। केवल इतना ही नहीं, यह संगठन रजनीकांत के पोएस गार्डन स्थित घर के बाहर धरना करने की योजना भी बना रहे हैं। साथ ही रजनीकांत के खिलाफ संगठन के कार्यकर्ता नारेबाजी भी कर रहे हैं। इन्हीं हालातों को देखते हुए रजनीकांत के घर की बाहर सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है जिससे वक्त रहते परिस्थितियों को संभाला जा सके।

रजनीकांत के घर के बाहर पुलिसकर्मियों को तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने बताया कि संगठन के कार्यकर्ताओं ने भीड़भाड़ वाले कैथेडरल रोड पर अभिनेता रजनीकांत का पुतला फूंका। जिसके बाद संगठन के कुछ कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया गया। दरअसल रजनीकांत की कन्नड़ उत्पति हमेशा से ही तमिलनाडु में काफी चर्चा का विषय रही है।

रजनीकांत ने अपने प्रशंसकों के साथ चर्चा के दौरान कहा था, “मुझे सोशल मीडिया पर कुछ तमिल लोगों द्वारा घृणा फैलाने पर दुख होता है। कभी नहीं सोचा था कि वे इतना गिर जाएंगे।” पिछले सप्ताह उनके इस बयान के बाद तमिल मुन्नेत्र पदई ने रजनीकांत से माफी की मांग की थी। इसी से साथ विरोध करने वाले संगठन का कहना है कि रजनीकांत तमिल नहीं है लेकिन रजनीकांत ने इस बात को गलत बताया। उन्होंने कहा कि उनका पैतृक गांव तमिलनाडु के कृषनगरी जिले के गांव में है। उन्होंने खुद को नान पचाई तमिजाहन (शुद्ध तमिल) बताया था। रजनीकांत ने कहा था कि मैं 23 वर्षों तक कर्नाटक में रहा और 43 वर्षो से तमिलनाडु में रह रहा हूं। मैं कर्नाटक से एक मराठी के तौर पर यहां आया था, आप लोगों ने बहुत प्यार दिया, मुझे एक सच्चा तमिल बना दिया।

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