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New Delhi: दिल्ली में यमुना के बढ़ते जलस्तर को देख जहां कश्मीरी गेट के आसपास के कई निचले इलाकों में पानी भर चुका है वहीं कई लोग बाढ़ आने की संभावना से भी घबराए हुए हैं। इन हालातों पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का कहना है कि यमुना का जलस्तर 206.6 मीटर है। अब तक किसी की जान नहीं गई है। अस्थायी टेंटों की व्यवस्था कर दी गई है। जैसे ही पानी पर्याप्त रूप से नीचे जाता है लोग अपने घरों में वापस जा सकते हैं।

हालांकि इस बढ़े हुए जलस्तर से किसी के हताहत होने की खबर तो नहीं आई है लेकिन कल उस्मानपुर में जीरो पुस्ता के पास की एक बस्ती में 4 लोगों के एक परिवार को बचाया गया, इस परिवार का घर कल पानी में डूब गया था। पुराने यमुना के बिज्र (लोहा पुल) पर पानी का स्तर 206.60 मीटर पहुंच गया है।

केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि पानी का स्तर आज 1 बजे से 5 बजे के बीच 207.08 मीटर तक पहुंच जाएगा। कल आईएसबीटी कश्मीरी के पास किशन कॉलोनी और यमुना खादर के घरों में घुसे पानी घुस गया था। बढ़ते जलस्तर के कहर से निगमबोध घाट भी नहीं बच सका । असल में यमुना अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

दिल्ली में इस बाढ़ जैसे हालात के पीछे रविवार को हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज से रविवार को छोड़ा गया 8 लाख क्यूसेक पानी है। यमुना का जलस्तर 205.94 मीटर है जो कि खतरे के निशान 205.33 मीटर से 0.61 मीटर ज्यादा है। इस बढ़ते जलस्तर के बाद ऐसी संभावना जताई जा रही है कि दिल्ली में 40 साल सबसे बड़ी बाढ़ के आने का खतरा है जिसके देखते हुए अरविंद केजरीवाल ने 24,000 लोगों को सुरक्षित जगहों पर भेजने का निर्देश दे दिया है।

बाढ़ के हालातों से लोगों को बचाने के लिए 2,100 से ज्यादा अस्थायी टेंटों की व्यवस्था की गई है। सावधानी के तौर पर लोहे के पुल को बंद कर दिया गया है। केंद्रीय जल आयोग का कहना है कि दिल्ली में बाढ़ का खतरा मंगलवार देर रात से लेकर बुधवार सुबह तक है।

इससे पहले दिल्ली में 1978 में बाढ़ आई थीए उस समय यमुना में 7 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था जिसके बाद यमुना का जल स्तर 207.49 मीटर तक पहुंचा गया था। जिसके बाद दिल्ली के कई इलाकों को बाढ़ के कहर से जूझना पड़ा था।

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